हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच मॉरीशस ने मालदीव के साथ अपने सभी राजनयिक संबंध तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की है। यह कदम चागोस द्वीप समूह को लेकर दोनों देशों के बीच उभरे विवाद के बाद उठाया गया है।
मॉरीशस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि मालदीव द्वारा चागोस द्वीप समूह पर अपने दावे को लेकर रुख बदलने और मॉरीशस-ब्रिटेन समझौते पर आपत्ति जताने के बाद यह निर्णय लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए आवश्यक है।
क्या है विवाद?
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों का समूह है। वर्ष 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से इन द्वीपों को अलग कर ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र का गठन किया था। इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा स्थापित है।
वर्ष 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अपने परामर्शात्मक मत में कहा था कि चागोस द्वीपों को मॉरीशस से अलग करना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं था और ब्रिटेन को यह क्षेत्र लौटाना चाहिए। इसके बाद से मॉरीशस ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने दावे को और मजबूती से उठाया है।
मालदीव का बदला रुख
हाल के महीनों में मालदीव ने चागोस द्वीप समूह को लेकर अपने दावे को दोहराया है। माले स्थित सरकार का कहना है कि इस क्षेत्र से संबंधित समुद्री सीमाओं और आर्थिक अधिकारों पर उसका भी ऐतिहासिक और भौगोलिक आधार है। मॉरीशस ने इसे अपने वैध दावे के खिलाफ बताया है।
क्षेत्रीय प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में सामरिक संतुलन पर भी असर डाल सकता है। डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के कारण यह क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनयिक संबंधों के निलंबन से दोनों देशों के बीच दूतावास गतिविधियां, आधिकारिक यात्राएं और उच्चस्तरीय वार्ताएं फिलहाल प्रभावित होंगी। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं और भविष्य में मध्यस्थता के प्रयास तेज हो सकते हैं।
निष्कर्ष
चागोस द्वीप समूह को लेकर बढ़ता विवाद हिंद महासागर की भू-राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। मॉरीशस और मालदीव के बीच यह तनाव आने वाले समय में क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रश्नों को और अधिक केंद्र में ला सकता है।













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