डेस्क : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बीते 48 घंटों के दौरान हिंसा और सैन्य टकराव ने भयावह रूप ले लिया है। प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण में प्रांत के 12 से अधिक शहरों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने व्यापक स्तर पर जवाबी अभियान चलाया।
शुक्रवार रात से शुरू हुई इस हिंसा की चपेट में क्वेटा, ग्वादर, मकरान, हब, चमन और नुश्की जैसे प्रमुख शहर आए हैं। BLA के उग्रवादियों ने पुलिस चौकियों, अर्धसैनिक बलों के ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले किए, जिससे हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, हालिया संघर्ष में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान दर्ज किया गया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 70 उग्रवादी मारे गए हैं। वहीं, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पुष्टि की कि इस दौरान 10 पुलिस और फ्रंटियर कोर (FC) के जवान शहीद हुए। ग्वादर के पास एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है।
BLA ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसने 14 शहरों में 48 अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की। संगठन के प्रवक्ता जयंद बलोच का कहना है कि नुश्की में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया गया और 84 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें दुष्प्रचार बताया है। इस बार हमलों में ‘मजीद ब्रिगेड’ के आत्मघाती हमलावरों के साथ महिला लड़ाकों के इस्तेमाल की भी पुष्टि हुई है।
रेल और सड़क संपर्क ठप
उग्रवादियों ने प्रांत की अहम सड़कों और रेलवे नेटवर्क को भी निशाना बनाया। नसीराबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर लगाए गए विस्फोटकों को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल पूरे बलूचिस्तान में ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। कई इलाकों में राजमार्ग जाम हैं और उग्रवादियों द्वारा वाहनों की तलाशी लेकर गैर-बलूच लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की खबरें सामने आई हैं।
बढ़ती हिंसा के पीछे कारण
एक स्वतंत्र थिंक टैंक CRSS की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में जारी असंतोष की जड़ें चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर स्थानीय आबादी में पनपे गहरे असंतोष से जुड़ी हैं।













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