डेस्क: दिल्ली लाल किले के पास धमाकों की साजिश रचने वाला आरोपी डॉक्टर भारत में इस्लामी कानून स्थापित करने के लिए सक्रिय था और वह वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा के भारत में सहयोगी संगठन अंसार गजावत-उल-हिंद (एजीयूएच) को फिर से सक्रिय करना चाहता था। यह समूह पहले जाकिर मूसा द्वारा स्थापित किया गया था, जो 2019 में दक्षिण कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।
सूत्रों के अनुसार, एजीयूएच के अंतिम ज्ञात कमांडर मुजमिल अहमद तांत्रे को 2021 में एक मुठभेड़ में मार दिया गया था। इसके बाद यह पहला गंभीर प्रयास था, जिसमें इस आतंकी मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास किया गया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लाल किले के पास धमाके से पहले ही देश में इस्लामी कानून लागू करने की साजिश की जांच शुरू कर दी थी। यह जांच जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और एजीयूएच के पर्चे श्रीनगर में मिलने के बाद शुरू हुई। पर्चे में स्थानीय लोगों से पुलिस के साथ सहयोग न करने और दुकानों में प्रवेश न देने का आह्वान किया गया था।
इस पर्चे के आधार पर शोपियां में एक मौलवी तक पहुंची पुलिस ने 9-10 नवंबर, 2025 को फरीदाबाद में छापेमारी की। इस दौरान कथित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ और लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ और अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए।
जांच में यह भी पता चला कि पाकिस्तान की शह पर आतंकी गुट अलग-अलग मॉड्यूल के माध्यम से घाटी में सक्रिय थे और देश के अन्य हिस्सों में हमले की योजना बना रहे थे। दिल्ली बम धमाकों में शामिल आतंकियों ने एक वैश्विक कॉफी चेन के मालिक, जो यहूदी हैं, को भी निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई, अदील अहमद राथर और शाहीन सईद ने जांच में बताया कि हमलों के टारगेट तय करने को लेकर उनके बीच मतभेद भी थे।













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