दुबई, जो कभी दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में शुमार था, अब लगभग खाली नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और हमलों ने शहर की चमक को खौफ में बदल दिया है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़े पैमाने पर शहर छोड़ चुके हैं, बीचेस, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सुनसान पड़े हैं। केवल स्थानीय मजदूर वर्ग ही बचा है, जो खाली जगहों पर काम कर रहा है।
ईरान के हमलों का असर
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। यूएई में अमेरिकी बेस होने के कारण, ईरान ने सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। पिछले दो हफ्तों में लगभग 1700 मिसाइल और ड्रोन दुबई समेत यूएई पर दागे गए, जिनमें से 90% को यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। हालांकि, गिरते मलबे (डेब्री) ने कई प्रतिष्ठित स्थलों को नुकसान पहुंचाया। बुर्ज अल अरब होटल, फेयरमॉन्ट द पाम, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर, दुबई एयरपोर्ट और कई स्काईस्क्रेपर्स प्रभावित हुए। एयरपोर्ट पर दो ड्रोन गिरने से चार लोग घायल हुए और उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं।
शहर क्यों खाली हुआ?
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में हजारों अमीर विदेशी निवासी और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्कूलों की स्प्रिंग ब्रेक के बावजूद पश्चिमी बच्चे नदारद हैं। बीच क्लब और रेस्तरां, जो पहले इन्फ्लुएंसर्स और टूरिस्टों से भरे रहते थे, अब सुनसान हैं। कई विदेशी निवासियों ने कहा कि जन-जीवन लगभग सामान्य है, लेकिन शेल्टर अलर्ट, आसमान में फ्लैश और गिरते डेब्री ने सब कुछ बदल दिया है।
पश्चिमी देशों के पेशेवर और रईस लोग चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारी रकम चुकाकर शहर छोड़ रहे हैं। जल्दबाजी में कई लोग अपने पालतू जानवर तक को सड़कों पर छोड़ गए। एयरपोर्ट पर उड़ानें सीमित होने के कारण हजारों लोग फंस गए। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर फ्लाइट्स शुरू की हैं।
पर्यटन और आम मजदूर प्रभावित
‘गल्फ टाइम्स’ के अनुसार, मध्य पूर्व में इस युद्ध के कारण पर्यटन उद्योग को रोजाना करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस (JBR), रेस्टोरेंट्स और दुबई मॉल जैसे इलाके, जो पहले भीड़ से भरे रहते थे, अब वीरान हैं। दुनिया के सबसे बड़े फेरिस व्हील ‘ऐन दुबई’ के पहिए भी थम गए हैं।
इस स्थिति का सबसे डरावना पहलू यह है कि पैसे वाले लोग दुबई छोड़ गए, जबकि दक्षिण एशियाई देशों (भारत, पाकिस्तान, नेपाल आदि) के लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी फंस गए हैं। काम ठप होने और फ्लाइट्स के महंगे होने के कारण उनके लिए स्वदेश लौटना मुश्किल हो गया। राहत की बात यह है कि भारत सरकार और एयरलाइंस के प्रयासों से 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और फ्री स्पीच पर अंकुश
यूएई सरकार ने एयर डिफेंस को मजबूत किया और नागरिकों को आश्वासन दिया। हालांकि पुलिस ने चेतावनी दी है कि हमले की तस्वीरें या वीडियो शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक 21 लोगों पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक 60 वर्षीय ब्रिटिश टूरिस्ट भी शामिल है। ब्रिटिश एंबेसी ने नागरिकों को सावधान किया कि यूएई के कानून बहुत सख्त हैं।
निष्कर्ष
दुबई की स्थिति अभी भी ‘खतरे से बाहर’ नहीं है। शहर की चमक कम हुई है, लेकिन मजदूर वर्ग और कुछ स्थानीय निवासियों के साथ जीवन जारी है। तेल की कीमतें, उड़ानें और पर्यटन पर असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।













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