डेस्क : मध्य‑पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। आज इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए। हमले के दौरान ईरान के कई सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया और राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में विस्फोट और आग की घटनाएँ देखी गईं।
अमेरिका ने इस ऑपरेशन को “Operation Epic Fury” और इज़राइल ने इसे “Lions Roar (शेर की दहाड़)” नाम दिया है। दोनों देशों का कहना है कि इस हमले का उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को चुनौती देना है और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हमले और जवाबी कार्रवाई
- ईरान ने अमेरिकी और इज़राइली हमलों का फौरन जवाबी हमला किया।
- ईरान की मिसाइलें यूएई, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और कतर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रही हैं।
- दुबई और आबू धाबी में मिसाइलों के चलते हवाई यात्रा बाधित हो गई है, कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कर दी हैं।
- ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई की सुरक्षा को विशेष ध्यान में रखा गया, उनके कार्यालय के पास भी विस्फोट की घटनाएँ हुईं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- पश्चिमी देशों ने अमेरिका‑इज़राइल के कदम का समर्थन किया है।
- रूस और कुछ अन्य देशों ने हमले की कड़ी आलोचना की है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
- मुस्लिम देशों के समूहों ने ईरान पर समर्थन जताया है और चेतावनी दी है कि इस हमले का जवाब देना आवश्यक है।
भारत की स्थिति
- भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
- ईरान और मध्य‑पूर्व में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा और यात्रा सलाह जारी की गई है।
आर्थिक और क्षेत्रीय असर
- तेल की कीमतों में उथल‑पुथल और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
- मध्य‑पूर्व में हवाई, समुद्री और व्यापारिक गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष अभी लंबा खिंच सकता है और क्षेत्रीय राजनीति व वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।













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