डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है। तेहरान के अनुसार, अमेरिकी फाइनेंशर जेफ्री एपस्टीन के बचे हुए नेटवर्क के सदस्य अमेरिका में 9/11 जैसी घटना कराने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद इसका आरोप ईरान पर डाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के लिए यह युद्ध अब लंबा और जटिल हो गया है। अमेरिका और इजरायल की सेनाओं के लगातार हमलों के जवाब में ईरान भी खाड़ी देशों पर पलटवार कर रहा है।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के प्रमुख सलाहकार अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता व्यक्त की। लारिजानी ने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि एपस्टीन नेटवर्क के कुछ बचे सदस्य 9/11 जैसी घटना कराने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। ईरान ऐसी किसी भी आतंकवादी साजिश का विरोध करता है और उसका अमेरिका की जनता से कोई युद्ध नहीं है।”
गौरतलब है कि लारिजानी ने पहले भी ट्रंप और अमेरिका पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता जनता के बीच रहते हैं, जबकि अमेरिका के नेता एपस्टीन आइलैंड पर रहते हैं। ट्रंप का नाम एपस्टीन की फाइलों में कई बार सामने आया, जिसके बाद उनके विरोधियों का मानना है कि उन्होंने एपस्टीन फाइल्स से ध्यान भटकाने के लिए वेनेजुएला और ईरान पर हमले की रणनीति अपनाई।
हालांकि, ट्रंप कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका एपस्टीन के साथ कोई खास संबंध नहीं था और वे एपस्टीन आइलैंड पर कभी नहीं गए। ट्रंप विरोधी लगातार उन्हें एपस्टीन का करीबी बताते रहे हैं।
एपस्टीन पर कई गंभीर आरोप लगे थे, जिनमें नाबालिगों के साथ यौन हिंसा, मारपीट, किडनैपिंग और फाइनेंशिंग शामिल हैं। उनकी मौत के बाद अमेरिकी खुफिया विभाग ने उनके काले-कारनामों की जांच की, और अब धीरे-धीरे रिपोर्ट सार्वजनिक हो रही है, जिसमें कई बड़े वैश्विक नाम सामने आए हैं, जैसे कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, माइक्रोसॉफ्ट संस्थापक बिल गेट्स, और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू।
लारिजानी को ईरान में सैन्य और प्रशासनिक जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने इस्लामिक शासन के खिलाफ विद्रोह दबाने में अहम भूमिका निभाई और युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार अमेरिका और इजरायल पर हमले जारी रखे।













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