गाजियाबाद : भोजपुर थाना क्षेत्र में एक ही पते पर 22 फर्जी पासपोर्ट जारी कराने के सनसनीखेज मामले में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मास्टरमाइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार मास्टरमाइंड प्रति पासपोर्ट डेढ़ लाख रुपये लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का ठेका लेता था। गिरोह में शामिल भोजपुर थाने का डाक मुंशी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जामिया नगर, दिल्ली निवासी मुस्ताक अहमद और दरियागंज, दिल्ली निवासी मुदासिर खान के रूप में हुई है। मुस्ताक पूर्व में ख्याला, दिल्ली में भी रह चुका है और प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ पासपोर्ट बनवाने का काम करता था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह प्रत्येक फर्जी पासपोर्ट के लिए डेढ़ लाख रुपये वसूलता था।
गिरोह में बंटी थीं जिम्मेदारियां
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह में हर सदस्य की भूमिका तय थी और उसी के अनुसार रकम का बंटवारा होता था। ग्राहक जुटाने का काम मुदासिर करता था, जिसके बदले उसे प्रति पासपोर्ट 25 हजार रुपये मिलते थे। फर्जी दस्तावेज तैयार होने के बाद पासपोर्ट आवेदन और प्रक्रिया की जिम्मेदारी गिरोह के सदस्य विवेक गांधी संभालता था, जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पूछताछ में हुआ खुलासा
मुदासिर ने पूछताछ में बताया कि वह मूल रूप से श्रीनगर, कश्मीर के बटमालू का रहने वाला है और कई वर्षों से दरियागंज में रहकर कैब चालक का काम कर रहा था। वर्ष 2019 में फर्जी कागजात बनवाने के सिलसिले में उसकी मुलाकात मुस्ताक से हुई थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का संगठित गिरोह तैयार कर लिया।
ऐसे संचालित होता था नेटवर्क
आरोपियों ने खुलासा किया कि पासपोर्ट के आवेदन उनके अपने मोबाइल नंबरों से किए जाते थे। कुल 22 पासपोर्ट में से 13 आवेदन एक ही मोबाइल नंबर से, छह दूसरे नंबर से और दो अन्य एक अलग नंबर से किए गए थे। गिरोह के सदस्य आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार करते थे। इन्हीं कागजात के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था।
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।













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