डेस्क: पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में हाल ही में हुई हिंसक घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश को जन्म दिया है। 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इज़राइल के हवाई हमले में मौत की खबर फैलने के बाद गिलगित और स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए। शुरू में ईरान समर्थक और अमेरिका-इज़राइल विरोधी रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक रूप ले लिया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और निजी होटलों में आग लगा दी। स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाने पर सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी की, जिसमें 13 लोग मारे गए। मृतकों में 6 छोटे बच्चे भी शामिल थे।
स्थानीय आक्रोश और विरोध:
गोलीबारी के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला। दन्योर चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सेना पर बच्चों सहित नागरिकों पर गोली चलाने का आरोप लगाया और इसे दमनकारी कार्रवाई बताया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ और नारे साफ दिखाई दे रहे हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में तनाव चरम पर:
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। बाल्टिस्तान के कई इलाकों में बाजार बंद हो गए, यातायात ठप हो गया और कई जगहों से गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर घायलों का इलाज शुरू कर दिया गया है, जबकि सुरक्षा बलों को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है।
सरकार और प्रशासन पर दबाव:
स्थानीय प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मदद पर विचार किया, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई की मौत की सुबह ही लोग सड़कों पर उतर आए और दोपहर तक स्थिति बिगड़ गई। यह घटना गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ते असंतोष और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ स्थानीय नारों को उजागर करती है। क्षेत्र पहले से ही आर्थिक समस्याओं, बिजली कटौती और प्रशासनिक दमन से जूझ रहा है। वायरल वीडियो और नारे अब सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं, और अगर स्थानीय लोगों की आवाज़ अनसुनी रही तो आक्रोश और फैल सकता है।













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