डेस्क : राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी करते हुए सरकार को दो महीने की समयसीमा दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि हाईवे की निर्धारित सीमा के भीतर बनी दुकानें, ढाबे और होटल सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि राजमार्गों के किनारे और सीमांकन क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण दुर्घटनाओं को आमंत्रित करते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और पुलिस की सहायता से विशेष अभियान चलाकर इन्हें हटाया जाना आवश्यक है।
विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश
न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर एक विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन करे। यह टास्क फोर्स पूरे राज्य में अतिक्रमण की पहचान करेगी और निर्धारित समयसीमा में उन्हें हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अतिक्रमणकारी स्वयं अवैध कब्जे नहीं हटाते हैं तो प्रशासन कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
सड़क सुरक्षा को बताया मौलिक अधिकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सुरक्षित आवागमन नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। इसलिए सड़कों पर किसी भी प्रकार का अवरोध या अवैध कब्जा अस्वीकार्य है।
अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग को राजमार्गों का सीमांकन और पैमाइश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। दोनों विभागों को अगली सुनवाई तक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि आदेश का पूर्ण पालन किया जाएगा और तय समयसीमा में प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।













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