डेस्क: पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यस्थों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान ने मौजूदा कूटनीतिक ढांचे को सख्ती से खारिज कर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान सहित सभी मध्यस्थ देशों को स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि नहीं भेजेगा और अमेरिका की मांगों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। कुल मिलाकर बातचीत अब पूर्णतः ठहराव की स्थिति में पहुंच चुकी है।
ईरान का इनकार, अमेरिका की शर्तें
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के लिए अपनी शर्तें दोहराई हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी युद्ध समाप्त करेगा जब अमेरिका युद्ध मुआवजा देगा, मध्य पूर्व से अपने सभी सैन्य ठिकाने हटाएगा और भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी देगा। इन मांगों पर सहमति न बनने के कारण वार्ता रुक गई है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के रुख को स्वीकार नहीं करता और इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक में हिस्सा नहीं लेगा। इस कड़े रुख ने मौजूदा वार्ता प्रक्रिया के रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं।
पाकिस्तान की कोशिश नाकाम
पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान परोक्ष कूटनीति के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा था। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने सार्वजनिक रूप से इस्लामाबाद में वार्ता कराने की पेशकश की थी। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से १५ सूत्रीय प्रस्ताव ईरान को सौंपा था। इससे पहले चीन और पाकिस्तान ने मिलकर ५ सूत्रीय शांति योजना भी प्रस्तुत की थी।
हालांकि, अमेरिका की कठोर रणनीतिक मांगों और जमीनी स्तर पर जारी सैन्य कार्रवाइयों के चलते ईरान ने इस प्रक्रिया से दूरी बना ली। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास के कारण पाकिस्तान की मध्यस्थता प्रारंभ से ही अत्यंत जटिल थी।
बढ़ता सैन्य तनाव
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में अमेरिकी एफ-१५ई स्ट्राइक ईगल को मार गिराया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विशेष बलों ने एक पायलट को बचा लिया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
तुर्की और मिस्र नए विकल्प तलाश रहे
इस्लामाबाद चैनल के विफल होने के बाद अब तुर्की और मिस्र नए स्थानों पर बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। दोहा और इस्तांबुल संभावित वार्ता स्थल के रूप में सामने आए हैं।
विवाद की जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित समझौते में यह प्रस्ताव था कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक व्यापार के लिए खोल देता है, तो इसके बदले युद्धविराम लागू किया जा सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत में युद्धविराम पर चर्चा की। बाद में उन्होंने अपने मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि ईरान युद्धविराम चाहता है।
हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी संभव है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह “खुला और स्वतंत्र” हो। उन्होंने चेतावनी दी कि तब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को झूठा और निराधार बताया है। वहीं, संघर्ष का दायरा अब बढ़ता नजर आ रहा है। बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने उच्च सतर्कता जारी कर अपने नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने की सलाह दी है। इसके साथ ही बहरीन से लेकर दुबई तक मानवरहित विमान हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।













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