डेस्क : भारतीय लोकतंत्र के सबसे संवेदनशील दौर आपातकाल (भारत, 1975-77) के समय कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। इन्हीं में एक घटना जुड़ी है मशहूर गायक किशोर कुमार से, जिनकी आवाज को उस दौर में जबरन खामोश कर दिया गया था।
दरअसल, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार चाहती थी कि किशोर कुमार सरकारी अभियानों के प्रचार में अपनी आवाज दें। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से उनसे संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
किशोर कुमार का यह सीधा इनकार सरकार को रास नहीं आया। इसके बाद उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया गया। आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे सरकारी माध्यमों पर उनके गानों के प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
यह प्रतिबंध लगभग 6 महीनों तक जारी रहा, जो उस समय बेहद बड़ा कदम माना गया, क्योंकि उस दौर में रेडियो और टीवी ही मनोरंजन के प्रमुख साधन थे। किशोर कुमार के गानों की लोकप्रियता इतनी थी कि इस बैन ने उनके प्रशंसकों को भी चौंका दिया।
इतिहास के जानकार मानते हैं कि यह घटना उस समय के राजनीतिक माहौल और अभिव्यक्ति की सीमाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। एक कलाकार द्वारा सरकार के निर्देश को न मानने पर इस तरह की कार्रवाई, उस दौर की सख्ती और सेंसरशिप का प्रतीक बन गई।













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