नई दिल्ली: दिल्ली की विशेष अदालत द्वारा दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति (Excise Policy) 2021‑22 मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई (CBI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है। अब इस याचिका की सुनवाई 9 मार्च 2026 को जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की पीठ के समक्ष होगी।
विशेष अदालत ने 27 फरवरी को अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत किए गए आरोपों में “प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता”। अदालत ने यह भी कहा कि नीति के निर्माण में कोई “व्यापक षड्यंत्र या आपराधिक इरादा” साबित नहीं हुआ और अभियोजन का मामला केवल अनुमानों पर आधारित था।
अदालत ने अभियोजन पर यह भी चिंता जताई कि गवाहों के बयानों पर अत्यधिक निर्भरता दिखाई गई और बिना स्पष्ट साक्ष्यों के आरोपियों को शामिल करने का प्रयास किया गया। अदालत ने इस मामले में सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की भी सिफारिश की।
यह मामला दिल्ली की 2021‑22 उत्पाद शुल्क नीति से जुड़ा है, जिसे लागू करने के बाद कथित रूप से कुछ निजी शराब लाइसेंसधारियों को लाभ पहुँचाने के आरोप लगे थे। सीबीआई का आरोप था कि इस नीति में अनियमितताओं के कारण रिश्वतखोरी हुई और दिल्ली सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे।
अब हाई कोर्ट में सीबीआई अपनी अपील में विशेष अदालत के फैसले को रद्द करने और आदेश को स्थगित करने की मांग करेगी।
मुख्य बिंदु:
- सुनवाई की तारीख: 9 मार्च 2026
- आरोपियों की संख्या: 23, जिनमें केजरीवाल और सिसोदिया प्रमुख हैं
- अदालत का तर्क: नीति में कोई आपराधिक षड्यंत्र नहीं, साक्ष्यों की कमी
- सीबीआई की अपील: निचली अदालत के बरी करने के आदेश को चुनौती













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