डेस्क: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार लंबा चल सकता है, लेकिन कर्मचारी पहले से ही अपनी मांगें तेज कर रहे हैं। इसी कड़ी में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) और NC-JCM की बैठक हुई, जिसमें 8वें वेतन आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में रक्षा, रेलवे, डाक, आयकर, लेखा एवं लेखा परीक्षा सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख डिमांड
बैठक में केंद्र सरकार के सैलरी स्ट्रक्चर, प्रमोशन पॉलिसी, एनुअल सैलरी इंक्रीमेंट और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी:
- प्रमोशन सुनिश्चित करना: प्रत्येक कर्मचारी को सेवा अवधि में कम से कम पांच प्रमोशन देने की मांग। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निचले स्तर पर काम कर रहे प्रतिभाशाली कर्मचारियों को सीमित प्रमोशन अवसरों के कारण निराशा होती है।
- फिटमेंट फैक्टर समान करना: कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग।
- पेंशन व्यवस्था में बदलाव: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की पुरानी मांग दोहराई गई।
- परिवार इकाई का विस्तार: वर्तमान में तीन सदस्य की फैमिली यूनिट को बढ़ाकर पांच सदस्य करने का प्रस्ताव। संगठनों का कहना है कि सैलरी निर्धारण में माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए।
- भत्ता बढ़ाने की मांग: स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) से वंचित शहरों में कर्मचारियों को 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने और इंटरनेट जैसी सेवाओं के लिए भी भत्ता देने का प्रस्ताव रखा गया।
18 सवालों के जवाब और ज्ञापन तैयार
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के महासचिव सी. श्रीकुमार के अनुसार, 8वें वेतन आयोग द्वारा वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब तय समयसीमा के भीतर भेजने पर सभी पक्ष सहमत हैं। अगले 10-15 दिनों में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को समेटते हुए एक साझा ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि 10 मार्च को अगली बैठक में साझा ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद 1-2 सप्ताह के भीतर इसे 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इन सुधारों से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि सरकारी सेवा में निष्पक्षता और संतुलन भी कायम रहेगा।













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