नई दिल्ली : पैगंबर मोहम्मद को लेकर वर्ष 2022 में हुई टिप्पणी के बाद विवादों में आईं भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने कहा है कि वह आज जीवित हैं तो इसका श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों से वह बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रही हैं और सुरक्षा कारणों के कारण उनकी आज़ादी लगभग समाप्त हो चुकी है।
कट्टरपंथियों से मिल रही धमकियों के चलते नूपुर शर्मा को दिल्ली पुलिस की कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। इसी वजह से वह सार्वजनिक कार्यक्रमों और सभाओं में बहुत कम दिखाई देती हैं।
2022 की टिप्पणी के बाद बढ़ा था विवाद
जून 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर एक टीवी बहस के दौरान नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कई देशों में भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
विवाद बढ़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इस दौरान उन्हें ‘सिर तन से जुदा’ जैसी गंभीर धमकियां भी मिलने लगी थीं, जिसके बाद वह लंबे समय तक पुलिस सुरक्षा में अज्ञात स्थानों पर रहीं।
“मैं जीवित हूं तो सिर्फ इसलिए…”
14 मार्च को आयोजित एक महिला सम्मेलन में नूपुर शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,
“मैं यहां आंकड़े देने के लिए नहीं खड़ी हुई हूं। मैं भुक्तभोगी हूं। पिछले चार वर्षों से आज़ादी खोकर जीवन जी रही हूं। लेकिन अगर आपकी यह बहन आज सांस ले रही है, जीवित है और सुरक्षित है तो केवल इसलिए कि इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह हैं। वरना शायद मैं और मेरा परिवार आज जीवित नहीं होते।”
बेटियों को आत्मरक्षा सिखाने की अपील
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बेटियों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनके माता-पिता ने उन्हें वकालत के साथ-साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिलाया होता, तो वह अपने परिवार की सुरक्षा बेहतर तरीके से कर पातीं।
महिलाओं की सुरक्षा में बदलाव का दावा
नूपुर शर्मा ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके अनुसार पहले महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी चिंताजनक खबरें अक्सर सामने आती थीं, लेकिन अब माहौल पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।
उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त भी बनाना आवश्यक है, ताकि वे हर परिस्थिति का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।













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