डेस्क : महाराष्ट्र की एकमात्र जीतने योग्य राज्यसभा सीट को लेकर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर सियासी खींचतान तेज हो गई है। इस सीट पर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने दावा ठोक दिया है। अब चर्चा है कि कांग्रेस ने ठाकरे से इस सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ने का अनुरोध किया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बरकरार रखने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है तो पार्टी के लिए आवश्यक संख्या बल बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल के विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से इस विषय पर बातचीत की है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्यसभा सीट कांग्रेस को दी जाए और बदले में शिवसेना (यूबीटी) को विधान परिषद की एक सीट (एमएलसी) दी जा सकती है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च तय है, जबकि परिणाम 16 मार्च को घोषित किए जाएंगे।
अप्रैल में कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी, फौजिया खान, रामदास आठवले, भागवत कराड, रजनी पाटिल और धैर्यशील पाटिल शामिल हैं। सत्तारूढ़ महायुति के पास बहुमत होने के कारण माना जा रहा है कि एमवीए केवल एक-एक सदस्य को राज्यसभा और विधान परिषद में भेज पाने की स्थिति में है।
सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए किसी भी विपक्षी दल के पास कुल सीटों का कम से कम 10 प्रतिशत या न्यूनतम 25 सदस्य होना आवश्यक है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 27 सदस्य हैं, लेकिन कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही कारण है कि यह एक सीट भी कांग्रेस के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
इधर, एमवीए के तीनों प्रमुख दल इस सीट पर अपनी-अपनी दावेदारी जता रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर वार्ता जारी है और कोई गतिरोध नहीं है। उन्होंने संख्यात्मक ताकत और ‘रोटेशन’ नीति का हवाला देते हुए दावा किया कि यह सीट शिवसेना (यूबीटी) को मिलनी चाहिए।
वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अपने दावे पर कायम है, हालांकि बातचीत का रास्ता खुला हुआ है और अंतिम निर्णय आपसी सहमति से लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस सीट के लिए सुप्रिया सुले ने भी गठबंधन सहयोगियों से अपने पिता शरद पवार के समर्थन की अपील की है।
संख्या बल की बात करें तो शिवसेना (यूबीटी) के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकांपा (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले एमवीए के भीतर अंतिम सहमति बनना बेहद अहम माना जा रहा है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

