नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र अब नजदीक आ गया है। इसके साथ ही सदन में नेता प्रतिपक्ष के लिए सपा में कई दावेदारों के नाम सामने आए हैं। इनमें सबसे तेज चर्चा सपा विधायक इंद्रजीत सरोज के नाम की है। इसके अलावा रामअचल राजभर भी इस दौड़ में प्रमुखता से शामिल हैं। इनमें से किसी एक के नेता प्रतिपक्ष बनने की संभावना सबसे ज्यादा है। हालांकि शिवपाल यादव भी इस पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। माना जा रहा है कि सपा विधानमंडल दल की बैठक में नए नाम का औपचारिक ऐलान होगा।
विधानसभा सत्र 29 अगस्त से शुरू हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष अभी तक खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव थे। अब वह संसद में पहुंच गए हैं। ऐसे में उनके लिए नेता प्रतिपक्ष के लिए खुद का उत्तराधिकारी चुनना आसान नहीं है। नेता प्रतिपक्ष पर पार्टी ऐसे नेता को चाहती है जो सदन में सामने बैठी भाजपा सरकार को जनहित के सवालों पर घेर सके। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव इस पद का जिम्मा पीडीए से आने वाले शख्स को ही देंगे। अगर दलित विधायक को मौका मिला तो यह विधानसभा में पहली बार कोई दलित वर्ग से आने वाला शख्स नेता प्रतिपक्ष होगा। सपा के वरिष्ठ नेता इंद्रजीत सरोज दलित हैं और वह इस वर्ग में पासी बिरादरी से आते हैं।
हाल में उनका बेटा पुष्पेंद्र सरोज सबसे कम उम्र का सांसद बना है। इंद्रजीत सरोज के अलावा ओबीसी वर्ग से राम अचल राजभर का नाम भी चर्चा में है। शिवपाल यादव भी इस पद के दावेदार बताए जाते हैं लेकिन विधान परिषद में लाल बिहारी यादव के नेता प्रतिपक्ष बनने से अब शायद किसी दूसरे यादव को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने से सपा संभवत: परहेज करेगी। शिवपाल यादव पहले भी नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। पीडीए के तहत मुस्लिम विधायकों में इकबाल महमूद व महबूब अली भी इस पद के दावेदार हैं। सपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सपा पीडीए से आने वाले विधायक को ही नेता प्रतिपक्ष का दायित्व देगी।













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