खेल डेस्क: इंग्लैंड की क्रिकेट प्रतियोगिता ‘द हंड्रेड’ में भारतीय कंपनी सन समूह के स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स द्वारा पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को खरीदे जाने के बाद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस फैसले को लेकर भारत में सामाजिक माध्यमों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अब भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
सनराइजर्स लीड्स की सह-मालकिन काव्या मारन की फ्रेंचाइजी ने हाल ही में हुई नीलामी में अबरार अहमद को लगभग एक लाख नब्बे हजार पाउंड यानी करीब दो करोड़ तीस लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। इतना ही नहीं, टीम के मुख्य कोच डेनियल वेटोरी ने नीलामी के बाद यह भी कहा कि पाकिस्तान के एक अन्य स्पिनर उस्मान तारिक भी टीम की नजर में थे।
सुनील गावस्कर ने अपने एक लेख में लिखा कि इस खरीद को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ है, वह बिल्कुल भी हैरान करने वाला नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत वर्ष दो हजार आठ में हुई थी, तब पाकिस्तानी खिलाड़ी भी इसमें खेले थे। लेकिन उसी वर्ष नवंबर में मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लीग से दूर रखना शुरू कर दिया।
गावस्कर ने लिखा कि समय के साथ यह समझ बनी कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी जाने वाली फीस अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और आम नागरिकों की मौत में योगदान बन सकती है, क्योंकि खिलाड़ी अपनी आय पर पाकिस्तान सरकार को कर देते हैं। उनके अनुसार इसी कारण भारतीय संस्थाओं ने पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को बुलाना लगभग बंद कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई भारतीय संस्था या उसकी विदेशी इकाई किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को भुगतान करती है और उसका मालिक भारतीय है, तो यह एक अत्यंत संवेदनशील विषय बन जाता है। गावस्कर के अनुसार टीम के कोच डेनियल वेटोरी न्यूजीलैंड से हैं, इसलिए संभव है कि वे इस भावनात्मक पहलू को पूरी तरह न समझ पाए हों, लेकिन फ्रेंचाइजी मालिकों को परिस्थितियों की गंभीरता को समझना चाहिए था।
गावस्कर ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ऐसे प्रारूप की प्रतियोगिता जीतना, जिसे दुनिया के बहुत कम देश खेलते हैं, भारतीयों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
गौरतलब है कि दो हजार आठ के मुंबई आतंकी हमलों के बाद इंडियन प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर रोक लग गई थी। इसके बाद पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले जैसी घटनाओं ने भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंधों को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
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