नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने तेज प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर आम जनता और विशेषकर युवाओं की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। पायलट ने आरोप लगाया कि बजट में कई योजनाओं की घोषणा तो की गई है, लेकिन उनका ठोस क्रियान्वयन रोडमैप गायब है।
पायलट ने कहा कि देश का युवा वर्ग लंबे समय से रोजगार के वास्तविक अवसरों की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस रणनीति दिखाई नहीं देती। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की पिछली रोजगार घोषणाओं का आज तक पारदर्शी मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया। कितने रोजगार वास्तविक रूप से सृजित हुए और कितने केवल कागज़ों में सीमित रह गए—इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।
आर्थिक चुनौतियों की बात करते हुए पायलट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अस्थिरता के बावजूद, घरेलू स्तर पर महंगाई, बेरोजगारी और मांग में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बजट में अपेक्षित दूरदर्शी और ठोस कदमों का अभाव निराशाजनक है। पायलट ने कहा कि बजट में केवल सामान्य और अस्पष्ट घोषणाएं की गई हैं, जबकि वास्तविक आर्थिक सुधार की दिशा में कदम नहीं उठाए गए।
महंगाई पर पायलट ने कहा कि आम आदमी पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान है। खाद्य और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती लागत से हर परिवार प्रभावित है, लेकिन बजट में महंगाई नियंत्रण के लिए कोई सशक्त उपाय नहीं दिखते।
महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पायलट ने निराशा जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कोई नई योजना नहीं लाई गई, जबकि खेती-किसानी और ग्रामीण विकास को लेकर बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई।
राज्यों के संदर्भ में उन्होंने राजस्थान और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शासित इन राज्यों में नई बड़ी परियोजनाओं की घोषणाओं का अभाव निराशाजनक है। पायलट ने इसे जनता के साथ धोखे के समान बताया और कहा कि लोग बजट से विशेष उम्मीदें लगाए हुए थे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।













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