डेस्क : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा की आरक्षित सीटों को लेकर चल रहा विरोध आंदोलन रविवार को हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर हुई भीषण झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। मृतकों में पुलिसकर्मी और नागरिक दोनों शामिल बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, हिंसा का केंद्र रावलकोट और आसपास के क्षेत्र रहे, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। स्थिति तब बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव शुरू हो गया, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप धारण कर लिया।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) लंबे समय से क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक अधिकारों और आर्थिक मुद्दों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का आरोप है कि विधानसभा में आरक्षित सीटों की मौजूदा व्यवस्था स्थानीय जनता के हितों के विपरीत है और इससे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा प्रभावित होती है।
क्षेत्रीय प्रशासन ने हाल ही में जेएएसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा था। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया तथा सुरक्षा बलों पर हमले किए गए, जबकि आंदोलनकारी नेतृत्व ने पुलिस पर बल प्रयोग और दमनात्मक कार्रवाई के आरोप लगाए हैं।
हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है तथा कई संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने स्थिति पर नियंत्रण होने का दावा किया है, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पीओके में लंबे समय से सुलग रहे राजनीतिक असंतोष का संकेत है। हालिया हिंसा ने क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।













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