डेस्क:रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक नया मोड़ आया है। इस बार विवाद ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर गहराया है। रूस ने अमेरिका से शिकायत की है कि यूक्रेन ने उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि कुछ घंटे पहले ही यूक्रेन ने रूस पर भी ऐसा ही आरोप लगाया था। इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा कि रूस ने यूक्रेनी उल्लंघनों की सूची अमेरिका को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि यह सूची अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को दी गई है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने बेलगोरोद क्षेत्र और ज़ापोरिज़्ज़िया के रूसी-नियंत्रित हिस्सों में उसके ऊर्जा केंद्रों पर हमला किया। इसके जवाब में यूक्रेन ने दावा किया कि रूसी हमले के कारण उसके दक्षिणी खेरसॉन क्षेत्र में हजारों घरों की बिजली गुल हो गई। हालांकि, यूक्रेनी अधिकारियों ने बाद में बिजली आपूर्ति बहाल करने का दावा किया।
क्या समझौता हुआ था?
दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश एक-दूसरे पर ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने का आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक इस बात की कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई है कि ऊर्जा केंद्रों पर हमले रोकने को लेकर कोई औपचारिक समझौता हुआ था या नहीं।
वाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन और रूस दोनों “ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए एक समझौता विकसित करने पर सहमत” हुए थे। हालांकि, इस कथित समझौते की न तो लिखित पुष्टि हुई है और न ही इसके क्रियान्वयन के बारे में कोई ठोस जानकारी दी गई है।
पुतिन का सख्त रुख
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बैठक में यूक्रेन पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। पिछले महीने अमेरिका और यूक्रेन ने रूस को पूर्ण युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पुतिन ने इसे ठुकरा दिया था।
यूक्रेन-अमेरिका के बीच ‘मिनरल डील’
इस बीच, यूक्रेन और अमेरिका के बीच एक नए खनिज समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस समझौते के तहत अमेरिका को यूक्रेनी प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है, जिसके बदले यूक्रेन को अधिक सैन्य और आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।