डेस्क : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दो दिवसीय इज़राइल दौरा राजनीतिक गलियारों में विवाद का केंद्र बन गया है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिससे विपक्ष ने दौरे की टाइमिंग और उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सचिन पायलट का तीखा हमला
राजस्थान कांग्रेस के नेता सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को राष्ट्रीय हित के विपरीत और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि:
- दौरे की समय-सारणी संदिग्ध है।
- भारत की निष्पक्ष विदेश नीति को राजनीतिक और व्यक्तिगत हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
- विदेश नीति अब राजनीतिक शोभा या व्यक्तिगत रिश्तों तक सीमित हो गई है।
ओवैसी और जयराम रमेश ने जताया संदेह
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम के दौरे के तुरंत बाद अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला शुरू होने पर सवाल उठाया।
वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस समय प्रधानमंत्री का दौरा “नैतिक कायरता” का उदाहरण है, क्योंकि दुनिया नेतन्याहू की आलोचना कर रही थी।
दौरे की राजनीतिक और सामरिक अहमियत
प्रधानमंत्री मोदी ने तेल अवीव पहुंचकर इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इस दौरान 17 समझौते और 10 घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए गए। मोदी ने इज़राइल की संसद नेसेट को भी संबोधित किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह दौरा भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति पर लंबी छाया डालेगा। विपक्ष इसे समय की अनदेखी और सामरिक संवेदनशीलता के खिलाफ करार दे रहा है।
राजनीतिक निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस और एआईएमआईएम ने इसे भारत की विदेश नीति के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है। राजनीतिक गलियारों में यह यात्रा सावधानी और रणनीति पर सवाल उठाने का अवसर बन गई है।













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