डेस्क : नई दिल्ली में सरकारी सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही पर अब सीधे चोट कर दी गई है। वर्षों से दफ्तरों में देर से पहुंचने और मनमर्जी से काम करने की आदतों पर अब रोक लगाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
सरकार ने सभी विभागों में बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य कर दिया है। यानी अब हर कर्मचारी और अधिकारी को दफ्तर में तय समय पर मशीन में अंगूठा लगाकर अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी। और सबसे बड़ी बात—यह नियम सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सचिव, प्रधान सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों तक पर लागू होगा।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान कई अधिकारियों की गैरहाजिरी और देरी का मामला सामने आने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। इसके बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
अब देर से आने या समय से पहले दफ्तर छोड़ने पर सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग को रोजाना उपस्थिति रिपोर्ट तैयार कर मुख्य सचिव को भेजने का आदेश दिया गया है, जबकि मासिक रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी।
सरकार का रुख बिल्कुल साफ है—काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अधिकारी समय पर दफ्तर नहीं आएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
हालांकि इस फैसले से प्रशासनिक गलियारों में हलचल भी तेज हो गई है। कुछ अधिकारी इसे सख्ती बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि लगातार बैठकों और बढ़ते काम के बीच यह व्यवस्था और दबाव बढ़ा देगी।
लेकिन सरकार का संदेश साफ है—अब दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में ‘लेट-लतीफी’ का दौर खत्म, और जवाबदेही का नया युग शुरू।













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