डेस्क: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को सदन का माहौल उस समय अचानक गरमा गया, जब कार्यवाही के दौरान हुई लगातार टोका-टाकी से नाराज विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाया। स्थिति इतनी तीखी हो गई कि अध्यक्ष ने हेडफोन उतारकर फेंक दिया और लगभग दस मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर सदन से बाहर चले गए। इस घटनाक्रम ने सदन की अनुशासन व्यवस्था और संचालन शैली पर नई बहस छेड़ दी है।
चर्चा के दौरान बढ़ा तनाव
घटना उस समय हुई जब लोक सेवा आयोग से संबंधित भर्तियों के मुद्दे पर चर्चा चल रही थी। सपा विधायक रागिनी सोनकर द्वारा उठाए गए प्रश्न का उत्तर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना दे रहे थे। इसी बीच अध्यक्ष ने सपा विधायक कमाल अख्तर को प्रश्न पूछने का अवसर दिया।
हालांकि, कई सदस्यों द्वारा एक साथ हस्तक्षेप और टिप्पणी करने से सदन में शोरगुल बढ़ गया। अध्यक्ष ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन व्यवधान जारी रहा।
केतकी सिंह को बैठने का निर्देश
इसी दौरान भाजपा विधायक केतकी सिंह अपनी बात रखने के लिए खड़ी हो गईं। अध्यक्ष ने इसे नियम विरुद्ध हस्तक्षेप मानते हुए उन्हें बैठने के लिए कहा और स्पष्ट किया कि सदन का संचालन उनकी जिम्मेदारी है। शोर थमने के बजाय बढ़ता देख अध्यक्ष नाराज हो गए। उन्होंने हेडफोन उतारकर मेज पर फेंका और कार्यवाही स्थगित कर बाहर चले गए।
शायरी से बदला माहौल
अध्यक्ष के सदन से बाहर जाने के बाद सत्ता और विपक्ष के सदस्य उन्हें मनाने में जुट गए। कुछ देर बाद उनके लौटने पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने माहौल हल्का करने के लिए शायरी सुनाई। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने भी अध्यक्ष से मुस्कुराने का अनुरोध किया, जिससे सदन में हल्की हंसी और सकारात्मक माहौल बना। इसके बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई।
आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा भी उठा
सत्र के दौरान सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने आजमगढ़ के राजकीय मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक कर्मचारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पिछले 7-8 महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।
इस पर श्रम मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के लिए एक निगम का गठन किया है।
हालांकि दिनभर की कार्यवाही बाद में सामान्य रूप से चलती रही, लेकिन अध्यक्ष और विधायक के बीच हुई तीखी नोकझोंक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।













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