महाशिवरात्रि केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और सरलता का उत्सव है। इस दिन जब भक्तजन भगवान शिव का रात्रि-जागरण, अभिषेक और जप-तप करते हैं, तब भोजन भी सात्त्विक और व्रत-संगत होना चाहिए। प्रायः व्रत में साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर बनाई जाती है, किंतु यदि आप इस बार कुछ विशेष और उत्सव-सुगंधित बनाना चाहते हैं, तो साबूदाना की रसमलाई एक उत्कृष्ट विकल्प है।
यह व्यंजन पारंपरिक रसमलाई की कोमलता और व्रत की पवित्रता—दोनों का सुंदर संगम है।
सामग्री (4 व्यक्तियों के लिए)
रसमलाई बॉल्स के लिए:
- 1 कप साबूदाना
- 2 कप दूध
- 3–4 बड़े चम्मच शक्कर (स्वादानुसार)
- 1 बड़ा चम्मच कॉर्नफ्लोर या व्रत में मान्य आटा (जैसे सिंघाड़े का आटा)
- 1/2 छोटी चम्मच इलायची पाउडर
रबड़ी के लिए:
- 1 लीटर फुल क्रीम दूध
- 4–5 बड़े चम्मच शक्कर
- 6–8 केसर के धागे (वैकल्पिक)
- बारीक कटे बादाम और पिस्ता
बनाने की विधि
1. साबूदाना तैयार करना
साबूदाने को अच्छी तरह धोकर 3–4 घंटे या रातभर भिगो दें। जब दाने पूरी तरह फूल जाएँ और नरम हो जाएँ, तब उन्हें हल्का सा मिक्सर में दरदरा पीस लें। ध्यान रहे, पेस्ट बहुत पतला न हो।
2. बॉल्स बनाना
पीसे हुए साबूदाने में शक्कर, इलायची पाउडर और थोड़ा सा सिंघाड़े का आटा मिलाएँ। यदि मिश्रण अधिक ढीला लगे, तो थोड़ा और आटा मिलाया जा सकता है। अब छोटे-छोटे गोल बॉल्स बना लें।
एक पैन में 2 कप दूध उबालें और उसमें ये बॉल्स डाल दें। मध्यम आंच पर 8–10 मिनट तक पकाएँ, जब तक बॉल्स फूलकर नरम न हो जाएँ।
3. रबड़ी तैयार करना
दूसरे भारी तले वाले बर्तन में 1 लीटर दूध को धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें। बीच-बीच में चलाते रहें ताकि दूध नीचे न लगे। जब दूध लगभग आधा रह जाए, तब उसमें शक्कर और केसर डालें।
दूध के गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाने पर गैस बंद कर दें और इलायची पाउडर मिलाएँ।
4. संयोजन
दूध में पके साबूदाना बॉल्स को हल्के हाथ से निचोड़कर अतिरिक्त दूध निकाल दें और उन्हें तैयार रबड़ी में डालें। 2–3 घंटे के लिए फ्रिज में ठंडा होने दें, ताकि स्वाद अच्छी तरह समा जाए।
ऊपर से बादाम और पिस्ता सजाकर परोसें।
विशेष सुझाव
- यदि व्रत में कॉर्नफ्लोर मान्य न हो, तो केवल सिंघाड़े या राजगिरे के आटे का प्रयोग करें।
- अधिक समृद्ध स्वाद के लिए थोड़ी सी गुलाब जल की कुछ बूँदें डाली जा सकती हैं।
- यदि आप इसे शुगर-फ्री बनाना चाहते हैं, तो शक्कर की जगह व्रत में स्वीकार्य प्राकृतिक मिठास का प्रयोग करें।
महाशिवरात्रि की रात्रि जब “ॐ नमः शिवाय” का जप वातावरण में गूंजता है, तब यह कोमल और मधुर साबूदाना रसमलाई आपके व्रत को स्वाद और श्रद्धा—दोनों से पूर्ण कर देगी। यह केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि उपवास में भी उत्सव का अनुभव कराने वाली एक पवित्र प्रस्तुति है।













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