डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके बावजूद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि भारत में ईंधन की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और देशभर में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार हालात पर रखे हुए है पैनी नजर
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि अधिकारी पूरी तरह सतर्क हैं और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखने के लिए विभिन्न विभाग वैश्विक घटनाक्रमों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा,
“देश में ईंधन की बिल्कुल भी कमी नहीं है। वर्तमान में एक गंभीर युद्ध की स्थिति बनी हुई है, इसलिए स्वाभाविक रूप से कुछ चिंताएं हो सकती हैं। लेकिन संबंधित विभाग हालात की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और समय-समय पर जानकारी साझा करते रहेंगे।”
लोगों से न घबराने की अपील
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी को लेकर परेशान होटल और रेस्टोरेंट संचालकों तथा आम नागरिकों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, लेकिन केंद्र सरकार इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
करंदलाजे ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से फोन पर चर्चा की है और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर कर्नाटक सहित देशभर के होटल संचालकों की समस्याओं से अवगत कराया है। इसके साथ ही युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों—विशेषकर कन्नड़ नागरिकों—को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास भी जारी हैं।
आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती
मंत्री ने बताया कि भारत कच्चे तेल के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है और अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 80 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल मध्य-पूर्व के देशों से आयात करता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू
ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक नियंत्रण आदेश जारी करते हुए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने तथा देशभर में इसकी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रमुख हाइड्रोकार्बन को एलपीजी पूल में मोड़ने की व्यवस्था की गई है।
घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने गैस वितरण के संशोधित ढांचे में घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
- घरेलू और वाहन उपयोग: घरों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस और वाहनों के लिए सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
- उद्योग और विनिर्माण: औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत गैस मिलेगा।
- उर्वरक संयंत्र: उर्वरक उद्योगों को उनकी औसत खपत का 70 प्रतिशत गैस आवंटित किया गया है।
आपूर्ति संतुलन के लिए कटौती
घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को दी जाने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत तक कटौती की गई है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम अस्थायी है और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ी चुनौती
भारत को वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े लॉजिस्टिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। भारत की लगभग 30 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आयात इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है। वैश्विक संकट के बीच सरकार वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश भी कर रही है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
रेस्टोरेंट कारोबार पर असर
इस स्थिति का असर छोटे और मध्यम स्तर के खाद्य व्यवसायों पर भी दिखाई देने लगा है। हैदराबाद के ‘सोफी कबाब हाउस’ के मालिक अलीम खान ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता और कीमत दोनों को लेकर उन्हें भारी परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों से हमें कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला है। अगर यही स्थिति जारी रही तो व्यवसाय चलाना मुश्किल हो जाएगा।”
क्या है वैश्विक संकट की वजह
पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा है। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाया है।
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ना स्वाभाविक है।













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