डेस्क : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग (मिडिल क्लास) की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है। उन्होंने अनुमान जताया है कि वर्ष 2036 तक देश के कुल उपभोक्ता खर्च का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग द्वारा संचालित होगा।
वित्त मंत्री ने यह बात एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर अपने संबोधन के दौरान कही, जिसमें उन्होंने भारत में बढ़ते उपभोक्ता आधार और आर्थिक विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों, वित्तीय समावेशन और कल्याणकारी योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में परिवार मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं, जिससे देश में मांग और उपभोग आधारित विकास को मजबूती मिल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में मध्यम वर्ग अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके चलते देश में आर्थिक गतिविधियों का विकेंद्रीकरण हुआ है और कई नए शहर उपभोक्ता केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
वित्त मंत्री के अनुसार, डिजिटल कनेक्टिविटी, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और सरकारी नीतिगत सुधारों ने आम नागरिकों की क्रय शक्ति को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह मध्यम वर्ग ही है जो देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार का फोकस समावेशी विकास पर है, जिसके तहत अधिक से अधिक लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर मध्यम वर्ग का विस्तार किया जा रहा है।













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