डेस्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जब पाकिस्तान ने कश्मीरी महिलाओँ और सुरक्षा पर भारत को घेरने की कोशिश की तो भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथननेनी हरिश ने पाक की बखिया ही उधेड़कर रख दी। उन्होंने कहा कि यह तो वही देश है जिसने ऑपरेशन सर्चलाइट चलाकर महिलाओं के साथ रेप करने के लिए सेना को खुली छूट दे दी थी।
क्या था ऑपरेशन सर्चलाइट?
बात तब की है जब बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा हुआ करता था और इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जानते थे। 1970 में पूर्वी पाकिस्तान में चुनाव हुए और आवामी लीग ने चुनाव जीता। शेख मुजीबुर्रहमान सरकार बनाना चाहते थे लेकिन याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो नहीं चाहते थे कि वहां मुजीबुर्रहमान की सरकार बने। पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली पश्चिमी पाकिस्तान से मुक्ति चाहते थे। इसी बीच मुजीबुर्रहमान ने स्वतंत्रता आंदोलन चलाने का संकेत दे दिया। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना बंगालियों पर टूट पड़ी। पहले सेना ने बड़े शहरों को निशाना बनाया। आवामी लीग के नेताओं को ढूंढ-ढूंढकर मारा जाने लगा और फिर यह कत्ले आम में बदल गया। इसमें मासूम जनता खासकर हिंदू पिसने लगे। लोगों को खुले आम मार दिया जाता। महिलाओं के साथ रेप किया जाता। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस ऑपरेशन में करीब 30 लाख लोग मारे गए और 4 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ। यह उस समय की सबसे बड़ी मानव जनित विभीषिका थी जिसका जिक्र होने पर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
7 मार्च को ढाका में शेख मुजीबुर्रहमान ने ऐतिहासिक भाषण दिया था। इसमें उन्होंने अवज्ञा और असहयोग आंदोलन का आह्वान किया। तभी से पाकिस्तान की सरकार इस नृशंस अभियान की तैयारी में लग गई। इसके बाद 25 मार्च को शेख मुजीबुर्रहमान ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान से बात की थी। मुजीबुर्रहमान की तरफ से जब याह्या खान की मन मुताबिक बात सुनने को नहीं मिली तो तय समय से एक दिन पहले ही ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू हो गया। याह्य खान ने अपने क्रूर जनरल टिक्का खान को बांग्लादेश भेज दिया। सेना का आदेश दे दिया गया कि बंगालियों को घेरकर मारो। ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू होने के एक महीने के बाद ही लगभग 1 करोड़ शरणार्थी भारत आ गए थे। इसपर पाकिस्तान में एक हमीदुर्रहमान कमेटी बनी थी। उसकी रिपोर्ट को बाद में दबा दिया गया।













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