नई दिल्ली/लंदन:भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नई गति आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की उपस्थिति में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस समझौते पर दस्तखत किए।
यह करार भारतीय निर्यातकों के लिए खासा फायदेमंद माना जा रहा है। इसके तहत 99 फीसदी भारतीय उत्पाद अब ब्रिटेन में बिना किसी सीमा शुल्क के निर्यात किए जा सकेंगे। दूसरी ओर, ब्रिटेन की व्हिस्की, कारें, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल उपकरण जैसे कई उत्पाद भारत में सस्ते और सुलभ हो जाएंगे।
ब्रिटेन के कृषि बाजार में भारतीय किसानों को मिलेगी तरजीह
इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों को ब्रिटेन के 37.5 अरब डॉलर के कृषि बाजार में प्राथमिकता मिलेगी। खास बात यह है कि भारत ने डेयरी, खाद्य तेल और सेब जैसे संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रह सकें। समझौते के तहत 95 प्रतिशत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुओं पर भी अब कोई शुल्क नहीं लगेगा।
तीन वर्षों की मेहनत के बाद बनी सहमति
करीब तीन साल तक चली बातचीत के बाद बने इस करार से न केवल व्यापार में तेजी आएगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी विदेशी उत्पादों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अब मेडिकल उपकरणों और लग्जरी कारों पर औसत शुल्क 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह जाएगा। इससे इन उत्पादों के दाम घटेंगे और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
भारतीय पेशेवरों को भी राहत
इस समझौते में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा भुगतान से तीन वर्षों की छूट दी जाएगी। इससे ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय कंपनियों और भविष्य में वहां निवेश करने वाले उद्यमियों को आर्थिक लाभ होगा।
समझौते से किसे क्या मिलेगा?
भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
- वर्ष 2030 तक भारत और यूके के बीच व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
- ब्रिटिश कंपनियों को भारत के £38 अरब पाउंड के सरकारी खरीद बाजार में सीधी पहुंच मिलेगी।
- भारत को वैश्विक व्यापार में नई ताकत मिलेगी, जिससे वह 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा।
आम उपभोक्ताओं के लिए फायदे
- ब्रिटेन के उत्पाद जैसे कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, सैल्मन मछली और व्हिस्की अब भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे।
- बीमा और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे।
निर्यातकों और छोटे उद्यमों को अवसर
- भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बड़े बाज़ारों में आसान और सस्ता प्रवेश मिलेगा।
- वस्त्र, आभूषण, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और जूता उद्योगों के लिए निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।
- छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) के लिए भी यह समझौता अवसरों से भरा साबित हो सकता है।
ब्रिटेन के लिए भी बड़ा लाभ
- ब्रेक्सिट के बाद यह ब्रिटेन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता है।
- ब्रिटेन को भारत में निर्यात के लिए नए बाजार और कम शुल्क का लाभ मिलेगा।
- इस समझौते से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड की वृद्धि की उम्मीद है।
- ब्रिटिश कंपनियों को हर वर्ष लगभग 40 करोड़ पाउंड का शुल्क बचत होगी, जो अगले दशक में बढ़कर 90 करोड़ पाउंड तक हो सकती है।
किन उत्पादों पर अब नहीं लगेगा शुल्क:
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ: आम का गूदा, अचार, दालें, फल, अनाज, मसाले
- ऑटो और परिवहन उपकरण
- वस्त्र और परिधान
- रत्न और आभूषण
- समुद्री उत्पाद: झींगा, टूना, मछली का चारा
- सब्जी और खाद्य तेल (कुछ श्रेणियों में)
निष्कर्ष:भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता न सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। घरेलू उद्योगों, किसानों, उपभोक्ताओं और निर्यातकों — सभी को यह समझौता किसी न किसी रूप में लाभ पहुंचाने वाला है।













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