नई दिल्ली: नाटो (North Atlantic Treaty Organization) अपने सदस्य देशों को रक्षा सहयोग के तहत अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराता है, जिन्हें उच्च सुरक्षा के साथ भेजा जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इन हथियारों की तस्करी बढ़ रही है, जिससे वे अपराधी गिरोहों और आतंकवादी समूहों तक पहुंच रहे हैं। भारत में भी ऐसे कई संगठनों के पास नाटो-ग्रेड हथियार मिलने की घटनाएं सामने आई हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक शांति के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
पंजाब में पुलिस का बड़ा खुलासा
पिछले महीने पंजाब के शेरों में स्थित एक चेकपोस्ट पर पुलिस ने एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार को रुकने का सिग्नल दिया। तेज रफ्तार से भागने की कोशिश कर रहे संदिग्धों की कार पुलिस बैरिकेड्स से टकरा गई, और पुलिस ने हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी और लवप्रीत सिंह नामक दो अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। कार से चार ग्लॉक 19 पिस्तौलें, जिनमें से एक पर ‘मेड फॉर नाटो आर्मी’ लिखा था, बरामद हुईं। इसके अलावा, हवाला की रकम और गोला-बारूद भी जब्त किए गए।
तालिबान और वैश्विक हथियार तस्करी का बढ़ता खतरा
2021 में अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान के हाथों में बड़ी संख्या में नाटो के अत्याधुनिक हथियार आ गए, जिससे हथियारों की तस्करी को बढ़ावा मिला। इन हथियारों का इस्तेमाल भारत में आतंकवादी संगठनों द्वारा भी किया जा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
भारत के लिए बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां
भारत के पड़ोसी देशों से हथियारों की तस्करी और उनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में बढ़ रहा है। अफगानिस्तान की अस्थिरता और तालिबान के प्रभाव से भारत पर भी खतरे की आहट है।













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