नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सभी 70 सीटों के संभावित उम्मीदवारों पर गहन मंथन कर लिया है। अब केंद्रीय नेतृत्व के साथ अनौपचारिक बैठक और फिर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। चुनाव फरवरी की शुरुआत में होने की संभावना है।
हरियाणा-महाराष्ट्र की जीत से उत्साह, झारखंड की हार से सबक
भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को झारखंड के नतीजों के बाद नया रूप दिया है। पार्टी का मानना है कि जहां जनता से जुड़ाव सफल रहा, वहां जीत मिली। इस बार दिल्ली में भी जनता से जुड़ाव को प्राथमिकता दी जा रही है।
बड़े नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को उतार सकती है भाजपा
पार्टी इस बार बड़े नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी में है। पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, और पार्षदों में से योग्य उम्मीदवारों को चुना जाएगा। संभावित नामों पर निर्णय के लिए एजेंसियों से फीडबैक लिया गया है।
जनता से जुड़ाव और साफ छवि पर जोर
पार्टी का फोकस साफ छवि वाले और सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को साधने वाले उम्मीदवारों पर है। भाजपा का मानना है कि लोगों को यह विश्वास दिलाना होगा कि केवल भाजपा ही उनकी समस्याओं का समाधान कर सकती है।
भाजपा की रणनीति: मानसिकता में बदलाव
पार्टी नेता के अनुसार, जनता से जुड़ाव केवल व्यक्तिगत संपर्क से नहीं बल्कि उनकी मानसिकता बदलने से होगा। भाजपा की कोशिश है कि जनता को यह महसूस हो कि भाजपा की सरकार उनके हित में बेहतर विकल्प है।
दिल्ली चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियां जोरों पर हैं, और उम्मीदवारों की सूची जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।












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