नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में 21 अगस्त को होने वाले सुपरटेक के ट्विन टावरों के विध्वंस को रोकने की मांग करने वाले एक संगठन पर सोमवार को पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने याचिका को ”स्पष्ट रूप से विकृत” करार देते हुए कहा कि याचिका का उद्देश्य सीधे इस न्यायालय के फैसले के विपरीत परिणाम की तलाश करना है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 31 अगस्त को 32 मंजिला ट्विन टावरों को अवैध और राष्ट्रीय भवन संहिता, 2005 के विपरीत पाए जाने के बाद इन्हें ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता – सेंटर फॉर लॉ एंड गुड गवर्नेंस नामक एक गैर-सरकारी संगठन – ने कहा था कि इन टावरों को ध्वस्त करने के बजाय इन्हें किसी भी उपयोगी उद्देश्य के लिए स्थानांतरित करके प्रभावी उपयोग में लाया जा सकता है।
बेंच ने इस सुझाव का पक्ष नहीं लिया और याचिकाकर्ता से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए ऐसी याचिका कैसे दायर की जा सकती है। बेंच ने टिप्पणी की, “इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को ट्विन टावरों को ध्वस्त करने के अलावा अन्य विकल्प की तलाश में लगाया गया है। एक बार जब इस न्यायालय का निर्णय अंतिम हो जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 32 (सुप्रीम कोर्ट के रिट क्षेत्राधिकार) के तहत कोई भी याचिका सुनवाई योग्य नहीं होगी।”













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