नई दिल्ली : भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अगले सप्ताह न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की गैर-स्थायी सदस्यता हेतु भारत के अभियान का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह अभियान वर्ष 2027 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के चुनावों से पहले भारत के कूटनीतिक प्रयासों की शुरुआत माना जा रहा है, जिसमें भारत एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए चुनाव लड़ेगा।
इस चुनाव में जीत हासिल होने पर भारत नौवीं बार सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य बनेगा। जयशंकर की यह यात्रा हाल ही में कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम के दौरे के बाद हो रही है।
भारत का यह अभियान संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से लंबित सुधारों की उसकी मांग के साथ भी जुड़ा हुआ है। नई दिल्ली का लगातार कहना रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था आज की भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है और सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला तथा विकासशील देशों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाला बनाया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस वर्ष विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने संबोधनों में भी इस बात पर जोर दिया है कि वैश्विक संस्थानों में सुधार समय की आवश्यकता है, ताकि वे वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और संघर्षों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
हालांकि भारत की उम्मीदवारी को मजबूत माना जा रहा है, लेकिन एशिया-प्रशांत सीट के लिए ताजिकिस्तान भी दावेदार है, जिसे इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में आगामी चुनावों से पहले यह अभियान भारत की प्रमुख कूटनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुप्त मतदान के माध्यम से होता है, जिसमें उम्मीदवार को उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के दो-तिहाई मतों की आवश्यकता होती है।
भारत अब तक आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है। उसका सबसे हालिया कार्यकाल वर्ष 2021-22 का था। इस दौरान भारत ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, प्रौद्योगिकी तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। साथ ही भारत ने विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी भी दोहराई थी।
भारत का तर्क है कि विश्व की सबसे अधिक आबादी वाला देश, प्रमुख अर्थव्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता तथा ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज होने के कारण उसे वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए।
भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस सहित कई प्रमुख देशों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों को लेकर वर्षों से जारी प्रयास अब तक किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंच सके हैं।













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