डेस्क : ईरान ने अमेरिका पर द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी समझौते की सफलता दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है और यदि एक पक्ष अपने वादों से पीछे हटता है तो विश्वास बनाए रखना संभव नहीं होता।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने अपने दायित्वों का पालन नहीं किया और बार-बार ऐसे कदम उठाए, जिनसे दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि “ताली दोनों हाथों से बजती है”, इसलिए समझौते के टूटने की पूरी जिम्मेदारी ईरान पर नहीं डाली जा सकती।
प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान हमेशा वार्ता और कूटनीतिक समाधान का समर्थक रहा है, लेकिन किसी भी नई बातचीत के लिए अमेरिका को पहले अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा और पूर्व में किए गए वादों का सम्मान करना होगा। उनका कहना था कि केवल बयानबाजी से भरोसा कायम नहीं किया जा सकता।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका वास्तव में संबंधों को सामान्य बनाने और बातचीत को आगे बढ़ाने का इच्छुक है तो उसे एकतरफा नीतियों से पीछे हटकर व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समानता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर ही किसी नए समझौते की दिशा में प्रगति संभव है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों की कूटनीतिक गतिविधियों पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी रहेगी।













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