नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के इर्द-गिर्द उठे विवादों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। रविवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित ‘कारगिल समीक्षा समिति’ का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए।
जयराम रमेश ने लिखा— “यह याद दिलाना जरूरी है कि 30 जुलाई 1999 को भारत-पाक युद्ध समाप्त होने के केवल तीन दिन बाद अटल जी की सरकार ने चार सदस्यीय कारगिल समीक्षा समिति गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता के. सुब्रह्मण्यम ने की थी। यह समिति 15 दिसंबर 1999 को अपनी रिपोर्ट दे चुकी थी, जिसे संसद में पेश कर उस पर बहस भी हुई। लेकिन वह एक अलग समय था, प्रधानमंत्री अलग थे, बीजेपी का चरित्र भी अलग था और राजनीतिक माहौल भी।”
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि सोमवार से लोकसभा में और मंगलवार से राज्यसभा में पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे लंबी बहस होने जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोके जाने के बाद कांग्रेस ने दो दिवसीय विशेष सत्र की मांग की थी, जिसे सरकार ने तब खारिज कर दिया था। “फिर भी, देर आए दुरुस्त आए,” उन्होंने लिखा।
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में 8 महत्वपूर्ण बिंदुओं के जरिए सरकार से जवाब मांगा:
- पहलगाम हमला (22 अप्रैल 2025): रमेश ने कहा कि इस आतंकी हमले के ज़िम्मेदार अभी तक न्याय के कटघरे में नहीं लाए गए हैं। ये वही आतंकी हैं जो पुंछ (2023) और गुलमर्ग (2024) में भी हमलों में शामिल रहे हैं।
- सर्वदलीय बैठक: कांग्रेस की मांग पर बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के बजाय रक्षा मंत्री ने की। इसमें खुफिया एजेंसियों की विफलताओं पर सवाल उठे।
- जनरल अनिल चौहान का खुलासा: 30 मई को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने सिंगापुर में खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआती रणनीति में बड़ी चूकें हुईं।
- जकार्ता से उठी आवाज़: 29 जून को भारतीय रक्षा अधिकारी ग्रुप कैप्टन शिवकुमार ने कहा कि राजनीतिक दखल के चलते सैन्य संचालन बाधित हुए और एयरफोर्स को नुकसान उठाना पड़ा।
- चीन से छद्म संघर्ष: जुलाई में उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को चीन से तकनीकी और साइबर मोर्चे पर भी जूझना पड़ा।
- सुरक्षा तंत्र की विफलता: 14 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि पहलगाम हमला सुरक्षा व्यवस्था की असफलता का नतीजा था।
- अमेरिकी दखल और ट्रंप के दावे: 10 मई से अब तक डोनाल्ड ट्रंप 26 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत पर दबाव डालकर ऑपरेशन रुकवाया। उन्होंने कहा कि भारत के पांच लड़ाकू विमान गिराए गए होंगे। अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी साझेदार बताया गया और सेना प्रमुख को लंच पर बुलाया गया—जो पहले कभी नहीं हुआ।
- मीडिया नैरेटिव की असफलता: भारतीय मीडिया के कुछ वर्गों ने सरकार के इशारे पर अतिशयोक्तिपूर्ण रिपोर्टिंग की, जिसने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बनाए गए नैरेटिव को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमजोर कर दिया।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट के अंत में सवाल किया: “क्या संसद में होने वाली यह बहस एक और औपचारिक कवायद भर रह जाएगी या सरकार वास्तविक सवालों के जवाब देगी?”













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