डेस्क:राजधानी दिल्ली में घटी एक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक झकझोर दिया है। मां-बेटे जैसा सबसे पवित्र रिश्ता भी जब दरिंदगी की चपेट में आ जाए, तो सवाल सिर्फ़ अपराध का नहीं, बल्कि हमारी मानसिकता और सामाजिक व्यवस्था का भी उठता है।
हौज काजी इलाके में 39 वर्षीय एक बेटे को अपनी 65 वर्षीय बुज़ुर्ग मां के साथ बलात्कार करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीड़िता ने बताया कि बेटे ने न केवल शारीरिक उत्पीड़न किया, बल्कि यह कहते हुए उसे मानसिक रूप से भी यातनाएँ दीं कि वह उसे “पिछले कर्मों की सज़ा” दे रहा है।
धार्मिक यात्रा से लौटकर बदला आतंक में
पीड़िता और उसका परिवार इस महीने की शुरुआत में हज यात्रा से लौटा था। घर लौटने के बाद आरोपी ने मां के साथ मारपीट की और फिर कई बार जबरन संबंध बनाए। महिला की शिकायत में लिखा है कि वह गिड़गिड़ाती रही कि वह उसकी मां है, लेकिन बेटे ने रिश्ते की पवित्रता को रौंद डाला।
सवाल उठते हैं…
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आखिर एक बेटा इस हद तक कैसे गिर सकता है?
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यह अपराध सिर्फ़ कानून तोड़ना है या हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक जड़ों में पनप रहे अस्वस्थ विचारों का प्रतीक भी है?
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बुज़ुर्ग महिलाएँ, जो समाज में सबसे अधिक सम्मान की पात्र होती हैं, अगर घर के भीतर ही सुरक्षित नहीं हैं तो फिर उनकी रक्षा किससे होगी?
कानून और समाज दोनों की कसौटी
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन क्या सिर्फ़ गिरफ्तारी ही पर्याप्त है? यह घटना बताती है कि हमें सिर्फ़ कानून की सख़्ती नहीं, बल्कि समाज के भीतर गहराई से फैली मानसिकता पर भी चोट करनी होगी।
एक कराहता सवाल
आज यह घटना दिल्ली की गलियों से उठी है, कल किसी और शहर से उठ सकती है। सवाल यह है कि क्या हम ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ रिश्ते, संस्कार और मर्यादाएँ अब सिर्फ़ शब्द रह गए हैं?













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