नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य को साधने के लिए अगले एक महीने में दोनों पक्ष दो अहम दौर की वार्ताएँ करेंगे। इन वार्ताओं में मूल-नियम (Rules of Origin), बाज़ार तक पहुँच और वाइन व डेयरी उत्पादों पर शुल्क जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
इस सप्ताह यूरोपीय आयोग के कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ़ हेंसन और वाणिज्य प्रमुख मारोस शेफचोविक भारत दौरे पर आ रहे हैं, जहाँ वे भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। दोनों पक्ष वर्ष के अंत तक इस व्यापार समझौते पर मुहर लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-ईयू वस्तु व्यापार का आंकड़ा 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
व्यापार समझौते के अलावा भारत और ईयू कई नए परिवर्तनकारी कदमों को भी अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं। इनमें एक नई राजनीतिक-सामरिक दृष्टि और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए बुनियादी ढाँचे शामिल हैं। यह पहल मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच और भी अहम मानी जा रही है।
विशेष रूप से, ईयू 17 सितंबर को भारत के साथ अपने नए सामरिक दृष्टिकोण का अनावरण करेगा। यह दस्तावेज़ आने वाले वर्षों में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का मार्गदर्शक बनेगा। संभावना है कि इसे अगले साल की शुरुआत में भारत में होने वाले वार्षिक भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा।
अगले तीन महीनों में उच्च-स्तरीय बैठकें और दौरों की श्रृंखला भी तय की गई है। इसमें ईयू की राजनीतिक और सुरक्षा समिति (27 सदस्य देशों के राजदूतों का समूह) का भारत दौरा शामिल है। वहीं, इस महीने ब्रसेल्स में भारत-ईयू आतंकवाद-रोधी वार्ता होगी। अक्टूबर में ईयू संसद की स्थायी व्यापार समिति भारत आएगी और इसके बाद 20-21 नवंबर को इंडो-पैसिफिक मंत्री स्तरीय मंच का आयोजन होगा।
नवंबर में भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की अगली बैठक भी प्रस्तावित है। इसके साथ ही विदेश नीति और सुरक्षा वार्ता भी दिल्ली में होगी। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कैलास दिसंबर या जनवरी में भारत आने वाली हैं।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की 13वीं वार्ता इस सप्ताह नई दिल्ली में होगी जबकि अगला दौर अगले महीने की शुरुआत में ब्रसेल्स में होगा। अब तक 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है, जिनमें सीमा शुल्क व व्यापार सुगमता, विवाद निपटान, डिजिटल व्यापार, सतत खाद्य प्रणाली, लघु व मध्यम उद्यम, प्रतिस्पर्धा और सब्सिडी, तथा पूँजी प्रवाह जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालाँकि, कुछ महत्वपूर्ण अध्याय जैसे मूल-नियम और बाज़ार पहुँच अभी लंबित हैं। गैर-शुल्कीय बाधाओं पर भी असहमति है, मगर दोनों पक्ष आश्वस्त हैं कि सभी पेचीदा मुद्दों का समाधान “संतुलन” साधकर निकाला जाएगा।
पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईयू नेताओं एंटोनियो कोस्टा तथा उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई टेलीफोन वार्ता में जल्द समझौता करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई और वैश्विक स्थिरता व नियम-आधारित व्यवस्था को मज़बूत करने में भारत-ईयू साझेदारी की अहमियत पर ज़ोर दिया गया।
रक्षा सहयोग को मज़बूत करने के लिए दोनों पक्ष सूचना-सुरक्षा समझौते सहित तीन ढाँचागत समझौतों पर चर्चा कर रहे हैं। इनका उद्देश्य संयुक्त रूप से सैन्य उपकरण और हार्डवेयर विकसित करना है।
TTC की आगामी बैठक भी खास मानी जा रही है। वर्ष 2022 में गठित यह मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती तकनीकों पर सहयोग के लिए बनाया गया था। भारत के साथ ईयू की यह दूसरी तकनीकी साझेदारी है। इससे पहले जून 2021 में उसने अमेरिका के साथ पहला समझौता किया था।













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