डेस्क:समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने रविवार को बड़ा दावा किया। शिवपाल ने कहा कि उन्हें बीजेपी में शामिल होने और योगी कैबिनेट में मंत्री बनने का ऑफर दिया गया था। यह ऑफर भी बीजेपी के किसी प्रदेश स्तरीय नेता ने नहीं बल्कि केंद्र की मोदी सरकार में नंबर दो कहे जाने वाले देश के गृहमंत्री अमित शाह ने दिया था। अमित शाह ने शिवपाल को दिल्ली भी बुलाया था। शिवपाल ने कहा कि कई साल तक उनके संपर्क में रहा और बीजेपी को काफी अंदर से जाना तो पता चला कि उनकी नीयत में खोट है।
दरअसल अखिलेश यादव से अनबन के बाद शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी बना ली थी। कई साल तक अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने में लगे रहे। इसी दौरान वह बीजेपी के संपर्क में रहे। यूपी विधानसभा में भी शिवपाल कह चुके हैं कि वह लंबे समय तक बीजेपी के संपर्क में रहे हैं। रविवार को भारत समाचार के पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी में किसके संपर्क में रहे। इस पर शिवपाल ने बिना लाग लपेट कहा कि नंबर दो के संपर्क में रहा। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने दिल्ली भी बुलाया था लेकिन मैं गया नहीं। उन्होंने भाजपा में शामिल होने और मंत्री बनाने का ऑफर दिया था। मैं पहले से ही कई बार मंत्री रह चुका था। ऐसे में इस ऑफर का कोई मतलब नहीं था।
शिवपाल ने कहा कि 2017 से ही बीजेपी के संपर्क में था। अमित शाह के मन में यही था कि इसे इधर मिलाते रहो और फायदा उठाते रहो। देना लेना कुछ नहीं था। कई साल तक यही हुआ। वह हमेशा यही चाहते थे कि हमारे परिवार में फूटन बनी रहे और परिवार एक न हो सके। मुझसे बस कहते थे लड़िये। शिवपाल ने कहा कि फिरोजाबाद का चुनाव उन्हीं के कहने पर लड़ा था।
शिवपाल ने कहा कि उन लोगों को बहुत पहले ही समझ गया था लेकिन उस समय कोई रास्ता नहीं था। हालांकि माना कि अखिलेश से अलग होने पर अकेले भी नहीं था। संगठन तो मेरे पास था। इसलिए ही अमित शाह ने मंत्री बनने का ऑफर दिया था। मेरे मन में मंत्री बनने का कभी था नहीं। अगर होता तो चला ही जाता। मैं हमेशा समाजवादी रहा। बार-बार यही सोचता कि वहां जाता तो क्या मिल जाता। एमपी बना देते या प्रदेश अध्यक्ष भी बना सकते थे। यह सब विधानसभा में भी बोल चुका हूं।
मुलायम सिंह के कहने पर बनाई थी अलग पार्टी
शिवपाल यादव ने यह भी खुलासा किया कि अखिलेश यादव से अनबन पर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की सलाह पर ही प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की स्थापना की थी। शिवपाल ने बताया कि नेताजी ने उन्हें कहा था कि जब अखिलेश बात करने को तैयार नहीं हैं तो तुम अपनी पार्टी बना लो। चार साल बाद 2022 में उन्होंने अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय कर दिया था।
क्यों और कब बनी अखिलेश से दूरी
शिवपाल यादव ने उस वाक्ये का भी जिक्र किया जब अखिलेश यादव और उनके बीच दूरी बनी थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को बहुमत मिल गया था। इसी के बाद आई होली पर पूरा यादव परिवार सैफई में मिला। मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल सभी एक कमरे में बैठे थे। मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ी चर्चा हुई। शिवपाल ने कहा कि नेताजी के नाम पर हम लोग जीते थे इसलिए मैं चाहता था कि उन्हें ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। इस पर शिवपाल ने नेताजी से कहा कि आप एक साल मुख्यमंत्री रह लीजिए, फिर अखिलेश को बना दीजिए। तब तक अखिलेश मंत्री बना सकते हैं। इस पर नेताजी ने कहा कि किसी की तरफ से प्रस्ताव ही नहीं आ रहा। इस मैं मैंने कहा कि मैं प्रस्ताव दे रहा हूं। लेकिन रामगोपाल और अखिलेश ने जिद की और अखिलेश को ही बना दिया गया। शिवपाल बोले, यही वह समय था जब उनके और अखिलेश के बीच दूरी बननी शुरू हुई थी।













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