17 सितंबर, 1950 को गुजरात के मेहसाना में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी आज अपने जीवन के 75 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। साधारण परिवार से निकलकर देश का नेतृत्व करने तक की उनकी यात्रा केवल राजनीतिक उत्थान की कहानी नहीं है, बल्कि सेवा और समर्पण की मिसाल भी है।
2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद से लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सक्रिय, नरेंद्र मोदी का जन्मदिन हर वर्ष एक व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि जनकल्याण और लोकसेवा का प्रतीक बन गया है।
पिछले 11 जन्मदिनों की झलक
मोदी के जन्मदिन हमेशा विकास योजनाओं, सामाजिक अभियानों और आध्यात्मिक क्षणों से जुड़े रहे हैं। आइए देखते हैं, कैसे उन्होंने पिछले 11 वर्षों में इस दिन को मनाया—
- 2024: ओडिशा में 3800 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास और ‘सुभद्रा योजना’ का शुभारंभ, जो करोड़ों महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास है।
- 2023: ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ की शुरुआत—देश के शिल्पकारों और कारीगरों के सम्मान और कौशल विकास हेतु।
- 2022: मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में आठ चीतों को छोड़कर भारत की पारिस्थितिकी में ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया।
- 2021: कोविड महामारी के बीच, उनके 71वें जन्मदिन पर रिकॉर्ड 2.26 करोड़ टीके लगाए गए।
- 2020: महामारी के कारण सादगी, परंतु भाजपा ने इसे ‘सेवा सप्ताह’ के रूप में मनाया—रक्तदान, नेत्र परीक्षण और राहत कार्यों के साथ।
- 2019: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास ‘नमामि नर्मदा उत्सव’ में शामिल हुए।
- 2018: वाराणसी में छात्रों से संवाद और काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा।
- 2017: मां हीराबेन का आशीर्वाद लेकर सरदार सरोवर बांध राष्ट्र को समर्पित किया।
- 2016: गुजरात जाकर मां से मिले, देशभर में स्वच्छता और रक्तदान अभियान।
- 2015: दिव्यांग बच्चों से भेंट, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर विशेष ध्यान और ‘शौर्यांजलि’ प्रदर्शनी का अवलोकन।
- 2014: प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला जन्मदिन—मां के साथ सादगी से बिताया, साथ ही जम्मू-कश्मीर बाढ़ राहत कार्यों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया।
सेवा पखवाड़ा: राष्ट्र के नाम समर्पित
मोदी के जन्मदिन पर भाजपा ने परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी ‘सेवा पखवाड़ा’ की शुरुआत की है। स्वास्थ्य शिविरों से लेकर स्वच्छता अभियान और रक्तदान तक, यह उत्सव केवल उनके जीवन का नहीं बल्कि नागरिक सेवा का महापर्व बन चुका है।
इस वर्ष की झलक
अपने 75वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी मध्य प्रदेश के धार में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ और ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ जैसी योजनाओं का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, वे कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर जनसभा को संबोधित करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, वे गया के पितृपक्ष मेला में भी सम्मिलित हो सकते हैं—जहां भारत और विश्व से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण करने आते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह अवसर उनके जीवन के आध्यात्मिक पक्ष को भी उजागर करेगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन महज़ एक व्यक्तिगत तिथि नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जनकल्याण का पर्व बन चुका है। उनके लिए यह दिन हर वर्ष नए संकल्पों और लोकहित की योजनाओं का आरंभ होता है। 75वें वर्ष में प्रवेश करते हुए वे एक बार फिर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं—जहां व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का कल्याण ही उनका वास्तविक जन्मोत्सव है।













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