डेस्क:देहरादून में तैनात एक सरकारी शिक्षक पर आरोप है कि उसने पत्नी और परिवार के नाम पर बनाई गई तीन कंपनियों के माध्यम से लगभग 15,000 लोगों से 47 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। मामले की शिकायत मिलने के बाद एसएसपी अजय सिंह ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन कंपनियों के जरिये पिछले चार वर्षों में करीब 150 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
सुकन्या योजना और निवेश के नाम पर मुनाफे का प्रलोभन
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने शिकायत सर्व माइक्रो फाइनेंस इंडिया एसोसिएशन, दून समृद्धि निधि लिमिटेड और दून इन्फ्राटेक कंपनी के खिलाफ दर्ज कराई। ये कंपनियां 2021 में खोली गई थीं। लोगों को दैनिक जमा, आवृत्ति जमा, फिक्स्ड डिपॉजिट, मंथली इन्वेस्टमेंट और सुकन्या योजना में निवेश पर अतिरिक्त मुनाफे का लालच दिया गया।
लेकिन समयसीमा पूरी होने के बाद भी निवेशकों को उनकी मूल राशि वापस नहीं मिली। कंपनियों के मुख्य संचालक वर्तमान में फरार हैं।
पीड़ितों में रोष और भय
शनिवार को 50 से अधिक पीड़ित एसएसपी से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों का पैसा इन कंपनियों में लगाया था। कई महिलाएं रोते हुए आईं और कहा कि गिरफ्तारी का डर उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दे रहा। एसएसपी ने उन्हें निष्पक्ष और त्वरित जांच का भरोसा दिलाया।
शिक्षक के बच्चों की पढ़ाई और रियल एस्टेट का झांसा
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि आरोपी के दो बच्चे उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, आरोप है कि आरोपी ने निवेशकों को कुमाऊं में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में पैसे लगाने का झांसा दिया, जबकि अधिकांश रकम को कहीं और खर्च किया गया।
लोन लेकर दिए गए पैसे, बैंक खाते फ्रीज
विनोद कुमार नामक शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्होंने बैंक लोन लेकर निवेश किया था और अभी भी उसकी किश्त चुका रहे हैं। आरोपी ने लंबे समय तक पैसे लौटाने का वादा किया, लेकिन अब तक रकम नहीं मिली।
एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर इस मामले में दो बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जबकि छह और खातों की जांच की जा रही है। मुख्य संचालकों की तलाश जारी है और उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।













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