डेस्क:फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने हाल ही में एक इवेंट में आदमियों की मेंटल हेल्थ और फिल्मों में सेंसरशिप को लेकर बात की। जावेद अख्तर ने कहा कि जिन फिल्मों में अश्लीलता होती है वो पास हो जाती हैं और जिन फिल्मों में समाज का आईना दिखाया जाता है उन्हें पास होने में समस्या झेलनी पड़ती है।
फिल्म सेंसरशिप पर क्या बोले जावेद अख्तर
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अनंतरंग मेंटल हेल्थ सांस्कृतिक महोत्सव में बात करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, “इस देश में, फैक्ट ये है कि अश्लीलता पास कर दी जाती है, उन्हें नहीं पता कि ये गलत वैल्यूज हैं, यह एक पुरुषवादी दृष्टिकोण है जो महिलाओं को अपमानित करता है और ये असंवेदनशील है। जिसे पास नहीं किया जाएगा वो है समाज को आईना दिखाने वाली चीजें।”
जावेद अख्तर ने कहा कि फिल्में समाज में खुलने वाली खिड़की हैं जिससे आप झांक सकते हैं और फिर खिड़की बंद करते हो, लेकिन खिड़की बंद करने से वो ठीक नहीं हो जाएगा जो समाज में हो रहा है।
फिल्मों में दिखाई जाने वाली हाइपर मैस्कुलिनिटी के बारे में क्या बोले जावेद अख्तर
फिल्मों में दिखाए जाने वाली हाइपर मैस्कुलिनिटी का मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर जावेद अख्तर ने कहा कि ऐसी फिल्मों की पॉपुलैरिटी समाज के अप्रूवल की वजह से बढ़ती है। उन्होंने कहा, ऐसी फिल्में इसलिए बन रही हैं क्योंकि मर्दों की मेंटल हेल्थ ऐसी है। अगर आदमियों की मेंटल हेल्थ ठीक हो जाए, तो ऐसी फिल्में नहीं बनेंगी, और अगर फिर भी बनती हैं तो चलेंगी नहीं। उन्होंने कहा कि शो बिजनेस में दर्शक ही भगवान होती है। ये बुरे दर्शक होते हैं जो बुरी फिल्म को सफल कर देते हैं।













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