डेस्क: महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति में हाल ही में राजनीति की हलचल बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नवी मुंबई और ठाणे में आगामी नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र प्रदेश में बड़े राजनीतिक संकेत दिए हैं। भाजपा ने राज्य सरकार में वन मंत्री गणेश नाइक को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के 7 जिलों का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जिनमें ठाणे भी शामिल है। खास बात यह है कि नाइक को उपमुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।
कौन हैं गणेश नाइक
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गणेश नाइक मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों में भी बड़े नेताओं को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। वे अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से अलग हुए, फिर भी ठाणे में मजबूत जनाधार बनाकर रहे। उनके समर्थन से वाशी, नेरुल, एरोली, तुर्भे, घंसोली और ट्रांस ठाणे क्रीक (TTC) बेल्ट में शिवसेना के उम्मीदवारों ने चुनावी सफलता पाई।
1980 के दशक में नाइक नवी मुंबई में स्थापित बड़े नेता बन चुके थे। जैसे-जैसे शिवसेना का विस्तार हुआ, ठाकरे को हस्तक्षेप कर नाइक का क्षेत्र नवी मुंबई घोषित करना पड़ा। 1990 में उन्होंने बेलापुर से पहली बार विधानसभा चुनाव जीत दर्ज की और 1995 में मनोहर जोशी की सरकार में मंत्री बने। हालांकि, वे जोशी और ठाकरे से मतभेदों के कारण विवादों में भी रहे।
नाइक ने 1990 में अविभाजित NCP से हाथ मिलाया लेकिन हार का सामना किया। 2004 में एक्साइज मंत्री बने और 2019 में भाजपा में शामिल होकर एरोली से जीत हासिल की।
भाजपा के लिए रणनीतिक महत्व
नाइक के व्यापक जनाधार और मजदूर, ठेकेदारों तथा विभिन्न समुदायों—गुजराती, मुस्लिम, उत्तर भारतीय और अन्य पिछड़ा वर्ग—में समर्थन उन्हें भाजपा के लिए खास बनाता है। उनके जरिए भाजपा नवी मुंबई और ठाणे के उन इलाकों में भी पहुँच बना सकती है, जहाँ शिंदे की पकड़ कमजोर है।
भाजपा ने अक्टूबर में संकेत दिया था कि वे ठाणे और नवी मुंबई नगर निगम चुनाव अकेले लड़ सकते हैं, ताकि इन नगर निगमों में महापौर पद पर अपना नियंत्रण स्थापित किया जा सके। इसके जवाब में शिंदे की शिवसेना ने भी ठाणे क्षेत्र में अपनी चुनावी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।













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