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Home बिजनेस

EPF वेज सीलिंग बढ़ाने पर फैसला टला, सरकार बोली—पहले व्यापक चर्चा ज़रूरी

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
December 3, 2025
in बिजनेस
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ईपीएफओ

डेस्क:कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि अनिवार्य EPF योगदान के लिए तय बेसिक सैलरी की सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाई जाए। इसी मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन चर्चा छिड़ी, जब श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया से पूछा गया कि क्या सरकार EPF वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की योजना बना रही है। जवाब में मांडविया ने कहा कि इस तरह का फैसला लेने से पहले ट्रेड यूनियनों, उद्योग संगठनों और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक बातचीत जरूरी है।

सरकार ने क्या कहा

मांडविया ने बताया कि EPF की सीमा बढ़ाने से कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर असर पड़ता है और नियोक्ताओं की हायरिंग कॉस्ट भी बढ़ती है, इसलिए बिना चर्चा किसी बदलाव पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। फिलहाल, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक है, उनके लिए EPF में योगदान करना अनिवार्य है। इस सीमा से ऊपर वाले कर्मचारियों के लिए, खासतौर पर 1 सितंबर 2014 के बाद जॉइन करने वालों के लिए, EPF जॉइन करना वैकल्पिक है। उन्होंने कहा कि EPF स्कीम, 1952 के तहत 15,000 रुपये तक कमाई वाले सभी कर्मचारियों को PF में शामिल करना जरूरी है और इसके लिए अलग से कोई न्यूनतम वेतन मानक नहीं है।

क्या है डिटेल

सरकार ने बताया कि EPF की वेज सीलिंग को आखिरी बार 2014 में संशोधित किया गया था, जब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। अगर यह सीमा बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दी जाती है, तो ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में 30,000 रुपये कमाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF योगदान अनिवार्य हो जाएगा। इससे ज्यादा कर्मचारियों को भविष्य के लिए मजबूत सुरक्षा कवच मिल सकता है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और बातचीत के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।

गिग वर्कर्स को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मांडविया ने कहा कि गिग वर्कर्स EPF स्कीम, 1952 के दायरे में नहीं आते क्योंकि उनका काम पारंपरिक नियोक्ता–कर्मचारी संबंध पर आधारित नहीं होता। लेकिन सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए अलग से सामाजिक सुरक्षा प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसे लाभ शामिल हैं। इसके लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि इन कामगारों को भी बुनियादी सुरक्षा मिल सके।

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