डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद लगभग 90 सेकंड तक खड़े होकर तालियां बजाई गईं। यह दृश्य उनके इथियोपिया के पहले आधिकारिक दौरे का सबसे अहम क्षण रहा और भारत-इथियोपिया संबंधों में बढ़ती गर्मजोशी और भरोसे को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री के भाषण के समापन के तुरंत बाद तालियों की गूंज शुरू हुई, जो उनके मंच से उतरकर सांसदों से अभिवादन करने तक जारी रही। अपने संबोधन का अंत इथियोपियाई भाषा के शब्दों में आभार व्यक्त करते हुए करते हुए मोदी ने कहा, “आपकी मित्रता के लिए धन्यवाद, आपके विश्वास के लिए धन्यवाद… धन्यवाद।” संसद में मौजूद सभी सदस्यों ने उनके शब्दों का लंबे समय तक तालियों से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भारत-इथियोपिया साझेदारी को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगभग दो हजार वर्ष पुराने हैं, जो केवल व्यापार तक सीमित नहीं थे, बल्कि विचारों और जीवन-दृष्टि के आदान-प्रदान से भी जुड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अदीस और धोलावीरा जैसे बंदरगाह केवल व्यापार केंद्र नहीं थे, बल्कि सभ्यताओं के बीच सेतु थे।” उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि आधुनिक काल में यह रिश्ता तब और मजबूत हुआ, जब 1941 में इथियोपिया की मुक्ति के दौरान भारतीय सैनिकों ने इथियोपियाई लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया।
आर्थिक सहयोग पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियां इथियोपिया में सबसे बड़े निवेशकों में शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में भारत का निवेश 5 अरब डॉलर से अधिक है और इससे 75 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने घोषणा की कि भारत और इथियोपिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के शासन अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने सेवा वितरण और लोगों की पहुंच के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान सहयोग को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के समय भारत को इथियोपिया के साथ खड़े होने का गौरव प्राप्त हुआ। “भारत ने कोविड के दौरान 150 से अधिक देशों को दवाएं और वैक्सीन भेजीं। इथियोपिया को चार मिलियन से अधिक वैक्सीन खुराक की आपूर्ति करना हमारे लिए गर्व की बात थी,” उन्होंने कहा।
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने भारत के लोगों की ओर से शुभकामनाएं देते हुए इथियोपिया की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नमन किया। उन्होंने कहा, “इस महान भवन में जनता की इच्छा राज्य की इच्छा बनती है। जब राज्य का पहिया जनता के पहिए के साथ तालमेल में चलता है, तब प्रगति का पहिया आशा और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ता है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली द्वारा उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किए जाने पर आभार जताया। उन्होंने कहा, “मैं यह सम्मान भारत के लोगों की ओर से विनम्रता और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता हूं।”
इथियोपिया को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक बताते हुए प्रधानमंत्री ने भारत और इथियोपिया के बीच सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी धरती को मां के रूप में संबोधित करते हैं। “भारत का ‘वंदे मातरम्’ और इथियोपिया का राष्ट्रगान — दोनों ही मातृभूमि के प्रति उसी भावना को व्यक्त करते हैं,” उन्होंने कहा और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ के मंत्र को दोहराया।
इथियोपिया दौरे के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 से 18 दिसंबर तक अपनी विदेश यात्रा के अंतिम चरण में ओमान पहुंचे हैं।













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