डेस्क : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु खतरा था? इसको लेकर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान परमाणु हथियारों की किसी भी संलिप्तता का कोई संकेत नहीं मिला। जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित हैं और क्या कोई असामान्य गतिविधि नजर आई, तो ग्रॉसी ने कहा कि इस संघर्ष में परमाणु हथियारों की किसी भी भूमिका का कोई संकेत नहीं मिला, जो निश्चित रूप से पारंपरिक स्वरूप का था।
दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान एनडीटीवी से बात करते हुए ग्रॉसी ने आगे कहा कि भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए हमलों, खासकर उन इलाकों में जहां कथित तौर पर उसके परमाणु ठिकाने हैं; ने आईएईए में कोई विशेष चिंता पैदा नहीं की। ग्रॉसी ने स्पष्ट किया कि आईएईए की गतिविधियां उन अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुसार चलती हैं जिनमें संबंधित देश सदस्य होते हैं। हम कोई वैश्विक परमाणु पुलिस नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान और भारत दोनों ने अन्य राजनीतिक कारणों से एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि) में शामिल होने से इनकार किया है।
ग्रॉसी ने बताया कि आईएईए परमाणु ईंधन चक्र, रिएक्टरों, प्रयोगशालाओं आदि सहित परमाणु सुविधाओं का निरीक्षण करता है। परमाणु परीक्षणों के संबंध में उन्होंने कहा कि वियना स्थित सीटीबीटीओ (व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संगठन) इस संधि के लिए जिम्मेदार है, जो अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन परमाणु परीक्षणों की मौजूदगी या अनुपस्थिति का वैश्विक संदर्भ मानी जाती है। उन्होंने जोर दिया कि परमाणु परीक्षणों में सभी देशों को आत्मसंयम बरतना चाहिए।
दरअसल, ग्रॉसी का यह बयान 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आया है, जो 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवाद से जुड़े 9 ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे समूहों से जुड़े 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। संघर्ष 7 से 10 मई तक चला और युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ।













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