डेस्क : महिला आरक्षण को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच समाजवादी पार्टी ने एक नया प्रस्ताव सामने रखा है। पार्टी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वह मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान करने वाला विधेयक लाने पर विचार कर रही है।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि वर्तमान महिला आरक्षण व्यवस्था में समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों की महिलाओं को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की महिलाओं को भी राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर मिल सके।
इस मुद्दे को लेकर संसद में भी चर्चा देखने को मिली, जहां समाजवादी पार्टी के सांसदों ने ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। वहीं, इस प्रस्ताव पर सत्तापक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई और इसे संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताया गया।
पार्टी का तर्क है कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग को अलग करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के आधार पर सभी महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना है। उनका मानना है कि जब तक समाज के अंतिम पंक्ति में खड़ी महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक महिला सशक्तिकरण संभव नहीं है।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रस्ताव आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। कुछ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है, लेकिन इसने देश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर चल रही चर्चा को एक नई दिशा जरूर दे दी है।













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