नई दिल्ली: देश की प्रमुख प्राइवेट एयरलाइन कंपनी इंडिगो के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एयरलाइन के गलत कारोबारी तरीकों की जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा कि दिसंबर 2025 में हजारों उड़ानें रद्द करने के चलते उपभोक्ताओं की हवाई यात्रा तक पहुंच सीमित हुई, जो प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन है। इस खबर के बीच गुरुवार को निवेशक इंडिगो के शेयर पर खास नजर रखेंगे, जो बुधवार को 4,963.90 रुपये पर बंद हुए थे।
डीजीसीए ने लगाया भारी जुर्माना
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने 17 जनवरी को इंडिगो पर परिचालन में खामियों के लिए 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और एयरलाइन के सीईओ पीटर एलबर्स को चेतावनी दी। साथ ही DGCA ने एयरलाइन को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश भी दिया।
दिसंबर में उत्पन्न संकट
दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में इंडिगो ने हजारों उड़ानें रद्द कर दीं, जबकि कई उड़ानों में देरी भी हुई। इसका मुख्य कारण पायलटों की ड्यूटी से जुड़े नए नियमों के अनुरूप रोस्टर प्रबंधन में खामी था। इसके चलते एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी 63.6% से घटकर 59.6% हो गई। हालांकि, इंडिगो अब भी भारतीय हवाई यात्रा बाजार में अधिकांश हिस्सेदारी पर कब्जा बनाए हुए है।
18.81 लाख यात्री हुए प्रभावित
DGCA के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में रद्द उड़ानों और देरी के कारण 18.81 लाख यात्री प्रभावित हुए। एयरलाइन कंपनियों ने यात्रियों को मुआवजा देने और अन्य सुविधाओं पर कुल 28.78 करोड़ रुपये खर्च किए।
विशेष आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में 10,46,552 यात्री उड़ानों के रद्द होने और 8,34,453 यात्री दो घंटे से अधिक देरी वाले फ्लाइट्स के कारण प्रभावित हुए। प्रतिदिन करीब 2,300 उड़ानें संचालित करने वाली इंडिगो की 9.65% उड़ानें रद्द रही, जिससे 9,82,072 यात्री प्रभावित हुए। प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों या रिफंड प्रदान किया गया, जिस पर कंपनी ने 22.75 करोड़ रुपये खर्च किए।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

