डेस्क : केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के उस बयान से दूरी बना ली है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पी. विजयन केरल के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया कि अय्यर पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस से सक्रिय रूप से जुड़े नहीं हैं और वे केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता में विचार व्यक्त करते हैं।
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, “अय्यर का पार्टी से कोई वर्तमान संबंध नहीं है। उनके विचार पूरी तरह व्यक्तिगत हैं।” इसके तुरंत बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर केरल की जनता पर भरोसा जताया और कहा कि जिम्मेदार और जवाबदेह शासन के लिए UDF को सत्ता में लौटना चाहिए। रमेश ने लिखा, “केरल के लोग जानते हैं कि LDF और BJP गुप्त रूप से सहयोगी हैं। इसलिए वे UDF को वापस लाएंगे।”
केरल का पंचायती राज मॉडल और अय्यर का बयान
तिरुवनंतपुरम में आयोजित “विजन 2031: डेवलपमेंट एंड डेमोक्रेसी” सेमिनार में अय्यर ने कहा कि केरल का पंचायती राज सिस्टम देश में सबसे मजबूत है और इसे कानूनी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों का जिक्र करते हुए कहा कि केरल ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को भी लोकतांत्रिक अधिकारों में हिस्सेदारी का अहसास कराया।
अय्यर ने अपने भाषण में यह भी कहा कि केरल ने राजीव गांधी की उम्मीदों को भी सबसे बेहतर तरीके से पूरा किया है, बावजूद इसके कि राज्य में मार्क्सवादी-लेनिनवादी शासन है। उन्होंने पार्टी की गैरमौजूदगी पर दुख व्यक्त किया, लेकिन अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में निष्पक्ष और तथ्यपूर्ण बने रहे।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि केरल में UDF और LDF के बीच मुकाबला और भी गरम हो सकता है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी चुनावी रणनीति में पूरी तरह UDF को केंद्र में रखेगी, जबकि अय्यर के बयान को व्यक्तिगत राय माना जा रहा है।













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