लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में सरकारी नियुक्तियों में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों के बाद कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने संदिग्ध नियुक्तियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच समिति को दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। समिति का दायरा केवल चयन सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ज्वाइनिंग डेटा, आवेदन पत्रों की वैधता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच शामिल है।
विशेष रूप से समिति को वर्ष 2016 में एक्सरे तकनीशियन भर्ती प्रक्रिया और 2008 में हुई नियुक्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल करने के लिए कहा गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन भर्तियों में विज्ञापित पदों की तुलना में कहीं अधिक लोगों की नियुक्ति हुई, जिससे विभाग में अनियमितताएँ उजागर हुईं।
यदि जांच में नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया में अंतर पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम भ्रष्टाचार और नियुक्ति घोटालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है।
जिन स्थानों पर अवैध नियुक्तियों के प्रमाण मिलेंगे, वहां तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।













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