जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में मृतक कर्मचारी की बहू भी इस नियुक्ति की पात्र हो सकती है।
अदालत ने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति का मूल उद्देश्य केवल नियमों की औपचारिक व्याख्या नहीं, बल्कि संकट में फंसे परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देना है।
क्या है मामला
मामला एक ऐसे परिवार से जुड़ा है, जहां सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र को अनुकम्पा नियुक्ति दी जानी थी। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पुत्र का भी निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उसकी पत्नी पर आ गई।
बहू ने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए उसे अस्वीकार कर दिया कि नियमों के तहत बहू पात्र आश्रितों की श्रेणी में नहीं आती।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब परिवार की वास्तविक स्थिति यह दर्शाती है कि बहू ही पूरी तरह से आश्रित है, तो केवल तकनीकी आधार पर उसे वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति एक मानवीय व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है, न कि केवल नियमों की संकीर्ण व्याख्या करना।
निर्देश
कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि वह मामले पर पुनर्विचार करे और पूर्व आदेशों तथा वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले।
महत्वपूर्ण संकेत
यह फैसला ऐसे मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां मृतक कर्मचारी के बाद परिवार की जिम्मेदारी सीधे तौर पर बहू या अन्य आश्रितों पर आ जाती है। अदालत ने संकेत दिया है कि वास्तविक निर्भरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।













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