नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में तनाव कम होने के बाद भारत और चीन के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत पहली द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
दो दिवसीय यह बैठक 16 और 17 अप्रैल को आयोजित की गई, जिसमें एससीओ नेताओं द्वारा लिए गए फैसलों की समीक्षा की गई और संगठन के भीतर भविष्य की सहयोग रूपरेखा पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सुरक्षा, व्यापार, संपर्क, और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक आलोक ए. डिमरी ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व राष्ट्रीय समन्वयक यान वेनबिन ने किया। भारत यात्रा के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से भी मुलाकात की।
यह वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। वर्ष 2020 में सीमा तनाव शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच संवाद काफी सीमित हो गया था।
हाल के महीनों में एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर हुई बैठकों ने नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संवाद बहाल करने में मदद की है।
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि एससीओ का मुख्य फोकस आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबला होना चाहिए। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।













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